Desi Chudai Kahani

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मैं विकी, अपनी मम्मी की सहेली की चुदाई की कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने आंटी की मस्त फ्री मूड से सेक्स किया, आंटी को चोदा. मैं करनाल ...

मम्मी की सहेली को चोदा

मैं विकी, अपनी मम्मी की सहेली की चुदाई की कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने आंटी की मस्त फ्री मूड से सेक्स किया, आंटी को चोदा.

मैं करनाल का रहने वाला हूँ मेरी उम्र 22 साल है. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है. मेरे घर में 3 मेंबर हैं, मैं, मम्मी और पापा. मेरे पापा जॉब करते हैं और मम्मी हाउसवाइफ हैं. मैं स्टडी कर रहा हूँ. मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि किस प्रकार मैंने मम्मी की सहेली को चोदा.

ये बात आज से एक साल पहले की है तब समर वैकेशन चल रही थीं. मम्मी की वो सहेली हमारे पड़ोस में रहती हैं और उनका हमारे घर में आना जाना लगा रहता है. उनका नाम नीलम है. नीलम आंटी की हाईट 5 फुट 6 इंच है. उनके बड़े बड़े चुचे और बहुत मोटी गांड है

एक दिन मम्मी को किसी काम से मामा के घर जाना था. तो मैंने मम्मी से पूछा- आपके बाद हमारा खाना कौन बनाएगा?
मम्मी ने थोड़ी देर सोच कर कहा- मैं तुम्हारी आंटी को बोल देती हूँ कि वो तुम्हारा खाना बना देगी.
मैंने सहमति में सर हिला दिया.

तब मम्मी ने आंटी को फोन किया और कहा- नीलम यार, मुझे विकी के मामा के घर जाना है, तुम विकी और उसके पापा का खाना बना देना. मुझे 2-3 दिन लग जाएंगे.
उन्होंने कहा- ठीक है, मैं खाना बना दूँगी.. आप चिंता मत करो.

पापा सुबह ड्यूटी पर निकल गए, मम्मी सुबह 10 बजे निकल गईं और मैं अकेला घर पर रह गया था. लगभग 12 बजे डोरबेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला, बाहर आंटी खड़ी थीं.
आज आंटी में कुछ बात ही अलग थी.. मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.. क्या गजब की माल लग रही थीं. उन्होंने ब्लैक कमीज़ और वाइट सलवार डाली हुई थी. उनका फिगर बहुत मस्त लग रहा था.. नीलम आंटी का रंग वैसे ही बहुत गोरा था.. और उनकी 34 साल की उम्र भी आज धोखा दे रही थी.

मैंने आंटी को नमस्ते की और उन्होंने भी मुस्कुरा कर रिप्लाई दिया.

मैंने आंटी को अन्दर आने के लिए कहा. वो अन्दर आ गईं. मैंने उनसे कहा- आप सोफे पर बैठिए, मैं आपके लिए पानी ले के आता हूँ.

मैंने आंटी को पानी पिलाया तो उस टाइम उनकी चुन्नी हटी हुई थी और उनके कुरते का डीप गला होने के कारण उनके चुचे साफ़ दिख रहे थे. मेरी नज़र एकदम उनके चुचों पर पड़ी, मैं तो देखता ही रह गया और मेरा लंड भी खड़ा होने लगा. तब आंटी ने पानी पिया और कुछ देर रेस्ट किया.
उसके बाद वो कहने लगीं- विकी, मैं किचन में खाना बनाने के लिए जा रही हूँ.

मेरा नाम हेमन्त है, उम्र 23 साल, कद 5’8″ और लंड की लंबाई 5 इंच (नपा हुआ 13 सेंटीमीटर लम्बा और 8 सेंटीमीटर गोलाई में मोटा) है. ये बात 5 ...

कॉलेज गर्ल की चुत चुदाई पहले ही दिन

मेरा नाम हेमन्त है, उम्र 23 साल, कद 5’8″ और लंड की लंबाई 5 इंच (नपा हुआ 13 सेंटीमीटर लम्बा और 8 सेंटीमीटर गोलाई में मोटा) है.

ये बात 5 साल पहले की है, जब मैं अपनी स्कूल की पढ़ाई करके शहर कॉलेज में स्नातक करने गया. सेक्स के बारे में जानकारी स्कूल में ही हो गई थी, दोस्तो की बकचोदी से, नेट और ब्लू फिल्म की मदद से काफी जानकारी मिल चुकी थी कि चुत किस छेद का नाम होता है और इसका लंड के लिए क्या उपयोग होता है.

कॉलेज के पहले दिन मैं क्लास में बैठा हुआ बाकी स्टूडेंटस को आते देख रहा था. सब अच्छे अच्छे कपड़े पहन कर आ रहे थे, विशेष रूप से कॉलेज गर्ल.. आखिरकार स्कूल की वर्दी से मुक्ति जो मिल गई थी.

मैं देख रहा था कि तभी एक लड़का मेरे बगल में आकर बैठ गया. उसने मुझसे बातें करनी शुरू कर दीं.
लड़का- हाय.
मैं- हाय..
लड़का- तुम्हारा नाम?
मैं- हेमन्त.. और तुम?
लड़का- मनन.
मैं- कहाँ से हो?
मनन- यहीं भिवाड़ी का हूँ, तुम?

हम दोनों बातें कर ही रहे थे तभी हमारी बैंच पर एक लड़की आ कर बैठ गई.
मैं मनन से बोला- मैं तिजारा से हूँ.
लड़की- तुम तिजारा से हो?
मैं- हां, क्यों?
लड़की- तिजारा में हमारी रिश्तेदारी है इसलिए कहा.
मैं- कहाँ?
लड़की- इतना पता नहीं, हम वहाँ कम ही जाते हैं.
मनन- तुम कहाँ से हो?
लड़की- मैं तो यहीं की हूँ.
मैं- तुम्हारा नाम?
लड़की- रीमा.. और तुम दोनों?

रीमा एक सुन्दर हुस्न वाली कॉलेज गर्ल थी. गोरा रंग, उसका 32-26-33 का माप, 5’3″ का कद और डिज़ायन में कटे हुए कंधों से थोड़ा नीचे तक के बाल.
मनन- मैं मनन और ये हेमन्त.
रीमा- ओके.
मनन मुझसे बोला- तिजारा में कॉलेज नहीं है?
मैं- है.
रीमा- तो यहाँ क्यों?
मैं मजाक में बोला- लड़कियों को देखने.
रीमा- सिर्फ देखने या उनको चोदने?

उसकी इस बात पर मनन और मैं एक दूसरे को देखने लगे.

ये बात ज्यादा पुरानी नहीं है, इस बात को अभी कुछ 15 या 20 दिन हुए होंगे. वैसे तो मैं कानपुर से हूँ लेकिन मैं लखनऊ अपनी चाची के घर जन्माष...

लखनऊ में वासना से भरपूर चाची की चुदाई का मजा

ये बात ज्यादा पुरानी नहीं है, इस बात को अभी कुछ 15 या 20 दिन हुए होंगे.

वैसे तो मैं कानपुर से हूँ लेकिन मैं लखनऊ अपनी चाची के घर जन्माष्टमी मनाने गया था. इतने नजदीक शहर में रहने के बावजूद इससे पहले मैं अपनी चाची से सिर्फ एक बार मिला था, लेकिन तब मैं बहुत छोटा था और मुझे तब कुछ भी सही से मालूम नहीं था.

आप लोग तो जानते ही हैं कि लखनऊ की औरतें कितनी सुन्दर होती हैं. चाची भी बड़ी सुन्दर हैं, उनका फिगर 34-24-32 का है.

ये बात तब की है, जब मैं लखनऊ में अपनी चाची के घर में था, उनके घर में तीन लोग हैं. चाची चाचा और उनका एक 15 साल का लड़का है. उनके पति यानि मेरे चाचा दिन में काम पर होते थे और उनका लड़का राहुल स्कूल चला जाता था.

चाची के लिए पहले तो मेरे मन में कुछ गलत ख्याल नहीं था. मगर एक दिन सबके जाने के बाद चाची ने मुझसे कहा कि आकाश मैं नहाने जा रही हूँ, तुम यहीं बैठो… फिर हम साथ में चाय पिएंगे.
मैंने कहा- ठीक है चाची.

वो कुछ देर के बाद नहाने चली गईं. जब वो नहा चुकीं तो उन्होंने मुझे आवाज लगाई और कहा- आकाश बेटा जरा वहां मेरा टॉवल पड़ा होगा… दे देना, मैं भूल गई हूँ.
मैंने कहा- जी चाची अभी लाया.

मैं टॉवल लेकर बाथरूम की तरफ गया और चाची को बाहर से बोला- ये लो चाची आपका टॉवल.

चाची ने दरवाजे के पीछे से ही हाथ बाहर करके टॉवल ले ली. मुझे सिर्फ उनके हाथ ही दिखे, लेकिन फिर भी मैंने कुछ गलत नहीं सोचा. मैंने मन में सोचा कि होता है कभी कभी.

फिर मैं वापस सोफे पर आकर बैठ गया और चाची का इन्तजार करने लगा. फिर कुछ देर बाद चाची बाथरूम से निकलीं. जब वो बाहर निकलीं तो मैं पागल ही हो गया. वो एक बहुत ही ज्यादा पारदर्शी नाईटी पहन कर आई थी, जिसमें से उनकी काले रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी. उनको देख कर मुझे मेरे पुराने दिन याद आ गए. मैं तो बिल्कुल मदांध और पागल जैसा ही हो गया. मैं बस लगातार उनको देखे ही जा रहा था. उन्होंने मुझे अपनी तरफ देखते हुए देख लिया.

चाची ने पूछा- आकाश बेटा, तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?
मैं- कुछ नहीं चाची, आज पहली बार मुझे पता चला है कि परियां स्वर्ग में ही नहीं, यहाँ धरती पर भी रहती हैं, जिनमें से एक आप हैं… आज आप बहुत सुन्दर लग रही हैं. कहां छुपा कर रखी थी आपने इतनी सुन्दर जवानी!

मेरे मुँह से ये सब बातें सुन कर चाची को शर्म आ गई और वो बिना कुछ बोले बस हल्की सी मुस्कराहट के साथ अपने कमरे में चली गईं. अब तो मेरा बुरा हाल हो गया, पहली बार मैंने अपनी चाची को वासना भरी नज़रों से देखा था. सच में वो बहुत खूबसूरत लग रही थीं. अब मेरे दिमाग में बस चाची ही चाची थीं, मैं अब सिर्फ उनको भोगना चाहता था.

फिर थोड़ी देर बाद चाची उसी नाइटी में आईं और उन्होंने पूछा- चाय पीनी है?
मैंने हां कह दिया, फिर वो चाय बनाने चली गईं. थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे आवाज लगाई- आकाश बेटा, जरा यहाँ आना.
मैं उनके पास गया तो वो बोलीं- बेटा, जरा वो डिब्बा उतार देना, काफी ऊपर है.
मैंने कहा- ठीक है अभी उतार देता हूँ.

यह बात दिसम्बर के महीने की है, ठण्ड का मौसम होता है और लड़के लड़कियों में चुदाई की इच्छा भी प्रबल होती है। मेरी गर्लफ्रेंड जूही ( नाम बदला ...

गर्लफ्रेंड की कुंवारी सहेली की हॉट चुत की चुदाई

यह बात दिसम्बर के महीने की है, ठण्ड का मौसम होता है और लड़के लड़कियों में चुदाई की इच्छा भी प्रबल होती है। मेरी गर्लफ्रेंड जूही ( नाम बदला हुआ) की सहेली नाज की भी कुछ ऐसी ही हालत मालूम हो रही थी, उसकी चुत हॉट हो रही थी।
एक दिन उसने जूही से अपनी बात कही तो उसने मेरे से बताया। मैंने जूही को घर बुलाया और उससे बात की, पूछा कि तुम दोनों की चुदाई करूँगा तो चलेगा?
तो जूही भी मान गयी।

15 दिसंबर को जूही के घर वाले बाहर गए थे, नाज को मालूम नहीं था कि आज उसकी चुदाई होने वाली है, नाज जूही के घर आ गयी तो जूही ने मेरे को फ़ोन कर के बुला लिया.
मैं थोड़ी देर में उसके घर पहुंच गया और नाज़ को देख कर वापस जाने का नाटक करने लगा तो जूही ने मेरे को रोकते हुए कहा- आ गए हो तो चाय पी कर चले जाना!
और वो चाय बनाने के बहाने किचन में चली गयी.

जूही के हाल में आइना इस तरह से लगा था कि किचन में क्या हो रहा है सब दिखता था और हाल में क्या हो रहा है वो किचन से दिखता है.
मैं भी जूही के पीछे किचन में चला गया और उसकी चुची शर्ट के ऊपर से दबाने लगा.
मेरी वासना भारी यह हरकत नाज़ शीशे में देख रही थी और कामवासना से उसकी आंखें बड़ी होने लगी।

फिर मैंने जूही की शर्ट ऊपर कर के उसकी चुची नंगी कर ली और मसलने लगा और लोवर में हाथ डाल कर चूत मसलने लगा.
जूही एकदम नशे में आ गयी और हम दोनों को देख कर नाज़ अपने आपे से बाहर होने लगी और अपने हाथ से अपनी हॉट चुत सहलाने लगी.

जब नाज़ की आंखें कामुकता से बंद होने लगी तो मैं और जूही चाय बिस्कुट के साथ बाहर आ गए, नाज़ आपने आप को संभाल कर बैठ गयी, मगर उसकी गीली सलवार साफ झलक रही थी.

मैं बाथरूम जाने बहाना कर दूसरे रूम के दरवाज़े के पीछे छुप दोनों की बातें सुनने लगा, उं दोनों सहेलियों की बातों से पता चल गया कि नाज़ अभी चुदने के मूड में है.
मैं दरवाजे से बाहर आया और नाज़ के बगल में बैठ कर चाय पीने लगा और जान बूझ कर अपने ऊपर चाय गिरा ली.

चाय गिरते ही जूही ने मेरी पैन्ट और अंडरवियर उतार दी, अब मैं जूही और नाज़ के सामने नंगा था, जूही मेरे लंड को पकड़ कर नाज़ से बोली- तेरे को यही चाहिए था न? ले पकड़ ले!
नाज़ शरमा रही थी तो मैं उठ कर उसके मुंह के सामने लंड कर के खड़ा हो गया और हाथ उसके शर्ट के अन्दर डाल कर उसकी चुची दबाने लगा.

मेरी यह कहानी दो बहनों की जवानी की जरूरत पूरी करने की यानि चुत चुदाई है. लेकिन कहानी शुरू करने से पहले मैं देसी चुदाई कहानी  साईट का धन्य...

जवानी की जरूरत है चुत चुदाई

मेरी यह कहानी दो बहनों की जवानी की जरूरत पूरी करने की यानि चुत चुदाई है. लेकिन कहानी शुरू करने से पहले मैं देसी चुदाई कहानी  साईट का धन्यवाद करना चाहूँगा जिसकी कृपा से लंड को खड़ा कर देने वाली और चूत में उंगली डालने को मजबूर कर देने वाली कामुक कहानियाँ हमें और आपको पढ़ने को मिल जाती हैं।
दोस्तो, वैसे तो सभी पाठक और पाठिकाएँ मुझे जानते ही हैं लेकिन जो नए पाठक और पाठिकाएँ हैं जो शायद मुझे न जानते हों, उनके लिये परिचय देना थोड़ा आवश्यक हो जाता है।
मैं आगरा से एक 25 वर्षीय वीशु कपूर नाम का एक सजीला नौजवान हूँ जो जनवरी से अहमदाबाद में अपनी मौसी के साथ रहकर एक रेणुका लेडीज मसाज पार्लर में मसाज बॉय की हैसीयत से काम कर रहा हूँ जिसमें मुझे हर लड़की या औरत की फुल बॉडी मसाज और उनकी जरुरत के हिसाब से उनकी चुदाई भी करनी पड़ती है.

इसके अलावा रेणुका मैडम मुझसे होम डीलिवरी भी कराती है जिसके एवज में रेणुका मैडम क्लाइंट्स से एक मोटी रकम वसूलती है जिसका 50% मुझे रेणुका मैडम को देना पड़ता है। होम डेलिवरी का मतलब क्लाइंट्स के घर जाकर उसकी जवानी की जरूरत पूरी करनी होती है मतलब फुल बॉडी मसाज और चुदाई करना होता है।

मेरे जिम जाने के कारण मेरा बदन गठीला है और मेरे लंड की लंबाई और मोटाई घोड़े के लंड के समान है।

तो दोस्तो, बात 20 फरवरी की है, मैं सुबह नहा धोकर तैयार हुआ और अपने पार्लर आ गया तो मुझे पार्लर के गेट पर मेरी सहकर्मी पायल खड़ी मिल गई जो पार्लर में एक मसाज गर्ल की हैसियत से काम करती थी एवं कॅश काउंटर भी संभालती थी।
मेरा और पायल का रूटीन था कि पार्लर खोल कर हम अपने कपड़े चेंज करके पार्लर की ड्रेस मतलब मैं रेग्जीन का बना नेकर और बनियान और पायल रेग्जीन की ब्रा और स्कर्ट पहनती थी।

लेकिन सुबह सुबह ही पायल को मेरा लंड चूसना और उसका बीज पीना बहुत अच्छा लगता था इसलिये हम दोनों ही घर से पहने हुए कपड़े तो उतार देते थे लेकिन पार्लर की ड्रेस तभी पहनते थे जब पायल मेरा बीज पीकर मेरे लंड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ नहीं कर देती थी।

रोज की तरह मैं नंगा हुआ और मैंने अपना लंड चूसने के लिये पायल को आवाज़ लगाई तो पायल अपनी लैगी और कुरता उतार चुकी थी। वो अभी भी अपनी ब्रा और पैंटी पहने हुई मेरे पास आई तो मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतार कर उसे पूरी नंगी कर दिया, उससे कहा कि वो मेरा लंड चूसे!
तो वो मेरा लंड पकड़ कर चूसने लगी.
जैसे ही उसने मेरा लंड पकड़ कर अपने मुँह में डाला, तब तक झाड़ू पोंछा करने वाली बाई रेहाना (बदला हुआ नाम) आ गई और ‘पायल दीदी… पायल दीदी…’ कह के आवाज़ देने लगी।
उसे पता था कि मैं यहाँ पर क्या काम करता हूँ क्योंकि वो रोज़ाना लेट आया करती थी, जब पार्लर में ग्राहक हुआ करती थी तो मैं उससे कई बार कह चुका था कि जब सुबह पार्लर खोला करूँ तभी अपना काम करने आया करे और कल मैंने उसे अल्टीमेटम दे दिया था कि अगर वो सुबह के समय नहीं आ सकती तो कल आकर अपना हिसाब ले जाये इसलिये वो आज सुबह सुबह आ गई थी।
पायल ने कहा कि मैं यहाँ मसाज रूम में हूँ, तू तब तक बाहर की सफाई कर ले, ओ. के.
वो बोली- आप मसाज रूम में क्या कर रही हो सुबह सुबह?
पायल ने कहा- मैं वीशु जी के साथ हूँ।
रेहाना ने पूछा- पायल दीदी क्या मैं अंदर आ सकती हूँ?
पायल ने कहा- आ जा न, तेरे लिये कोई मना थोड़े ही है.

हैलो फ्रेंड्स मेरा नाम प्रणीता है, मैं 31 साल एक हॉट मॉल जैसी दिखने वाली विवाहित औरत हूँ. मेरी शादी 8 साल पहले हुई थी, मेरे पति इंजीनियर ...

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हैलो फ्रेंड्स मेरा नाम प्रणीता है, मैं 31 साल एक हॉट मॉल जैसी दिखने वाली विवाहित औरत हूँ. मेरी शादी 8 साल पहले हुई थी, मेरे पति इंजीनियर हैं और एक बड़ी कम्पनी में जॉब करते हैं.

मेरे घर में मैं, पति और देवर तीनों ही रहते हैं. मेरे सास ससुर नहीं है. एक और देवर है, जिसका नाम जीतू है. उसकी अभी अभी शादी हो गई है, वो अब मेरे साथ नहीं रहता.

जब मैं शादी करके आई थी तो वो 15 साल का था, मेरी सास ना होने के कारण उसकी सारी देखभाल मैंने ही की थी और उसने भी मेरा ख्याल बहुत कायदे से रखा था.

उस वक्त मेरे पति सुबह 8 बजे ही जॉब पर चले जाते थे. उनके जाने के बाद मैं जीतू को उठाकर स्कूल छोड़ने और लेने जाती थी. उसका हर तरह से ख्याल रखती थी. उसे क्रिकेट खेलने का शौक था.

उसके बड़े भाई यानि मेरे पति सेक्स में कुछ खास जोरदार नहीं हैं, उनका लंड केवल 4 इंच का ही है.

मैं मेरा पूरा ध्यान जीतू की पढ़ाई और क्रिकेट में लगाती. जीतू जब स्कूल से दोपहर को क्रिकेट खेल कर आता, तब मेरे साथ ही सोता था. अंजाने में उसने कितनी बार मेरे बोबे और गांड चुत को हाथ लगा दिया था लेकिन इस सबसे जैसे उसको कोई फीलिंग ही नहीं आती थी. उसके इस अनजाने में हुए स्पर्श से मुझे भी कुछ नहीं लगता था.

एक दिन जब वो थक के अपने कमरे में सोया हुआ था, तब उसकी पैन्ट में उसका लंड खड़ा हुआ था. उसकी पैन्ट फूली सी दिखी तो मैंने महसूस किया कि इसका लंड तो एकदम बड़ा लंड सा होना चाहिए.
मैं तो देखते ही रह गई कि 18 साल के लड़के का लंड इतना बड़ा कैसे होगा. उसके लंड की मोटाई मेरी कलाई जितनी थी और शायद लम्बा भी 7 इंच का होगा.

इसके बाद से मेरी बुझी हुई चूत फिर से सुलग गई और तब से मैं उसके साथ और घुलने मिलने लग गई. अब मैं उससे उसकी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछती, बिस्तर में लेटे लेटे उसकी पीठ पर अपने बोबे दबाती, लेकिन उसे कुछ फीलिंग ही नहीं आती. मैं सोच कर हैरान होती कि ऐसी मुझमें क्या कमी है. लेकिन फिर सोचती कि शायद उसका दिल साफ होगा इसलिए वो मेरे लिए कुछ नहीं सोचता है. उसका खड़ा लंड देख तो मैं हक्का बक्का रह जाती और मैं उसे टीज़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी.

जब वो नाराज़ हो जाता तो बिल्कुल मुझे चिपक कर सो जाता था. मेरे पेट में हाथ डाल कर मुझसे बातें किया करता और कभी कभी मेरे बोबों पर मुँह रखके सो जाता. उसके बड़े भाई ने एक दो बार देख लिया कि वो मुझसे बिल्कुल चिपक कर सोता है, लेकिन कुछ नहीं कहते थे. बस बोल देते थे कि क्या आजकल बहुत प्यार है देवर भाभी में.. और मैं सिर्फ़ मुस्कुरा देती थी.

आदाब अर्ज़ है दोस्तो, मैं महबूब अहमद खान 29 वर्षीय युवक हूँ और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश से हूँ. यह घटना मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव है. ...

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आदाब अर्ज़ है दोस्तो, मैं महबूब अहमद खान 29 वर्षीय युवक हूँ और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश से हूँ.
यह घटना मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव है.

बात तब की है जब मैं 18 वर्ष का था और स्कूल में 12वीं क्लास का छात्र था, मेरे परिवार में अब्बू, अम्मी और एक भाई है. भाई उस वक़्त काफी छोटा था.
हमारे घर में एक बहुत ही खूबसूरत काम वाली बाई आती थी जिसका नाम सुल्ताना( बदला हुआ नाम ) था. वो करीब 21 वर्ष की थी, गोरा रंग, कद करीब पांच फीट तीन इंच, गदाराया हुआ भरा भरा बदन और सबसे ख़ास बात उसकी मुस्कराहट बेहद कातिलाना थी.
सुल्ताना को अम्मी ने अभी कुछ दिन पहले ही काम पर रखा था, उससे पहले एक बूढ़ी अम्मा काम पर आती थी, जिन्होंने अब काम करना छोड़ दिया था.

मैंने जब से सुल्ताना को पहले दिन से देखा था, तब से मैं उसके सेक्सी बदन पर मर मिटा था, मेरा लंड उसको देखते ही खड़ा हो गया था और मैं उसके साथ चुदाई करना चाहता था.
मगर मैं कुछ नहीं कर पा रहा था क्यूंकि मेरी अम्मी आम तौर पर उसके आस पास ही रहती थीं.

सर्दियों के दिन थे, वो हमेशा सलवार सूट पहन कर आती थी, ऊपर से वो एक कार्डिगन या जरसी पहनती थी, ऊपर ऊपर सर पर से दुपट्टा भी लेती थी. हमारे घर अ कर वो सबसे पहले दुपट्टा उतार कर टांग देती, फिर अपना स्वेटर उतार कर रख देती और काम पर लग जाती. मैं उसे छिप चिप कर देखता था पर कई बार सामने हूँ होता तो मजा ही आ जाता था. जब वो स्वेटर उतार रही होती तो उसकी चुची स्वेटर में से निकाल कर बाहर को आती तो मेरा दिल मचल उठता कि मैं भाग कर उनको अपने दोनों हाथों में थाम लूँ और पहले बड़े प्यार से सहलाऊँ, फिर उन्हें दबा दबा कर मसल डालूं!
लेकिन दिल के अरमाँ दिल में ही दब कर रह जाते… अम्मी के खौफ के कारण!

इसी तरह कुछ महीने बीत गए और गर्मियों का मौसम आ पहुंचा. मेरी परीक्षा के बाद स्कूल में छुट्टी हो गयी और मैं घर पर रहने लगा. अब मैं रोज़ उसको लाइन देता था और मेरी मेहनत रंग लायी।

एक दिन मैं किचन में पानी पी रहा था और वो आँगन से बर्तन लेकर आई, उसने बर्तन अंदर लाकर रखे तो हम दोनों एक दूसरे के बेहद करीब खड़े थे और मैंने उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखा. कुछ देर यूं ही देखते रहने के बाद उसने अचानक से मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाते हुए धीरे से फुसफुसा कर कहा- हम आपके बहुत दीवाने हैं!

दोस्तो, पहली बार किसी लड़की ने मेरे लंड को हाथ लगाया था… मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि कैसा करंट लगा था मुझे!
मैं हैरान परेशान भी था उसकी ऎसी निडरता भरी हरकत से… मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि कोई जवान लड़की ऎसी हरकत कर सकती है. वो तो मेरे से भी बहुत गर्म निकली और एडवांस भी… सुल्ताना तो चुत चुदाई के लिए तैयार बैठी थी, उसकी कामवासना पूरी उफान पर लग रही थी.

चूँकि अम्मी किचन से ठीक बाहर बने डाइनिंग रूम में डाइनिंग टेबल पर बैठी थीं तो हमने कुछ और करना उचित नहीं समझा और मैं मुस्कुरा कर बाहर आ गया.
मेरे अब्बू डॉक्टर हैं और उनके पास एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन है जिसको लेकर वो मेडिकल कैंपों में जाना चाहते थे. उन्होंने अम्मी से मशवरा किया और उन दोनों ने लखनऊ के पास के एक गाँव में कैंप लगाने का निर्णय लिया.

मैं प्रकाश अपनी हिंदी पोर्न कहानी आपको बताने जा रहा हूँ, वो दो साल पहले शुरू हुई थी. मैं आपको यह एक सच्ची दास्तान बता रहा हूँ. मैं मुंब...

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मैं प्रकाश अपनी हिंदी पोर्न कहानी आपको बताने जा रहा हूँ, वो दो साल पहले शुरू हुई थी. मैं आपको यह एक सच्ची दास्तान बता रहा हूँ.

मैं मुंबई में रहता था. मैं और मेरा दोस्त एक ही बिल्डिंग में रहते थे, लेकिन तीसरे और पांचवें माले पर रहते थे. मेरे दोस्त का नाम ललित और उसकी बीवी का नाम रश्मि है. उसको एक साल का लड़का भी है. हम लोग एक दूसरे के घर पे आते जाते रहते हैं. मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था और ललित एक टेक्सटाईल कंपनी मार्केटिंग में है.

मैनेजर होने के कारण मेरे घर में सब कुछ है.. पैसे की कमी नहीं थी. उधर रश्मि को पैसे की जरूरत लगती तो वो मेरी बीवी से पैसे लेकर जाती थी. जब आती थी तो वो मुझे स्माईल देती थी. कभी कभी नीचे झुक जाती और आँचल गिरा देती थी, जिससे उसके बड़े बड़े चुचे ब्लाउज में से दिखाई देते थे.
फिर वो कातिलाना मुस्कान देकर आँचल ठीक कर लेती.

वो मई का महीना था, मेरी बीवी बच्चों को लेकर मायके चली गई थी. मैं आफिस में था कि बीवी का फोन आया कि रश्मि को पैसों की जरूरत है, तो शाम को आप उसे 2000 रुपये दे दीजिए. उसके बाद बीवी ने शायद उससे कह दिया कि मैं शाम को उसके घर जाकर उसे पैसे दे दूंगा.

मैं आफिस से आया और रश्मि के घर पर गया. मैंने दरवाजा खटखटाया और आवाज दी तो रश्मि ने अन्दर से आवाज दी- भाई साहब, आ जाइए, दरवाजा खुला है.

जैसे मैं अन्दर दाखिल हुआ तो देखा रश्मि अपने बच्चे को दूध पिला रही थी और इस अवस्था में उसकी चुची दिख रही थी.

मैं अन्दर आया तो भी उसने वो सब वैसे ही रहने दिया. फिर हम बातें करने लगे, बीच बीच में मेरी नजर उसके गोरी चुची पर जा रही थी, ये रश्मि में देख लिया था. दूध पिलाते पिलाते उसका बच्चा सो गया था, लेकिन उसने ब्लाउज बंद नहीं किया था, वैसे ही खुला रखा था और वो ऐसे ही मेरे से बात कर रही थी.

क्या मस्त चुची थी.. गोरा गोरा रंग.. उसके ऊपर काले रंग का नुकीला चूचुक… क्या नजारा था.
यह देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा था.

बात करते करते मैंने रश्मि से बोला- ये लो पैसे!
उसने हाथ आगे किया और हल्के से मेरा हाथ दबाते हुए एक आँख मार दी. मुझे कुछ समझ नहीं आया. मैं उठ कर जाने लगा.
वो बोली- रुको ना, चाय पीकर जाइए.
मैं बोला- ठीक है.

वो उठी और किचन की तरफ गांड मटकाते हुए चली गई. मेरी हालत तो खराब हो गई थी.

दोस्तो, मेरा नाम आयुष है प्यार से लोग मुझे आयु राजा कहते हैं। मेरी उम्र 28 साल है, शादीशुदा हूँ, घर में मैं और मेरी बीवी हम दोनों ही रहते...

अच्छे से करो ना !

दोस्तो, मेरा नाम आयुष है प्यार से लोग मुझे आयु राजा कहते हैं। मेरी उम्र 28 साल है, शादीशुदा हूँ, घर में मैं और मेरी बीवी हम दोनों ही रहते हैं, मेरा बिज़नेस है और मेरी बीवी हाउसवाइफ है।

बात तब की है जब मेरी बीवी मायके गई हुई थी।

रविवार था, मैं सोया हुआ था कि अचानक दरवाज़े की घण्टी बजी। मैं तपाक से उठा और दरवाजा खोला तो देखा कि एक खूबसूरत औरत दरवाजे पर खड़ी है।

क्या मस्त फ़ीगर थी उसकी !

वो और कोई नही हमारी घरेलू नौकरानी थी।

कयामत लग रही थी साली !

मैंने उसे कहा- कम-इन !

वो अंदर आ गई।

उसका नाम था सोना, हम उसे सोनी कहते थे। उसको काम पर लगे हुए कुछ ही महीने हुए थे, पर जब से वो काम पर लगी है उस दिन से ही मुझे स्माइल देती है, एक दिन तो उसने मुझे आँख भी मारी थी।

मैने उससे कहा था- यह क्या कर रही है?

तो वो सकपका कर बोली थी- आँख में कचरा चला गया था।

मेरे मन में भी उसे चोदने का ख्याल आता था, एक दम सॉलिड माल था।

एक बार वो सफाई कर रही थी, अचानक उसका दुपट्टा नीचे सरक गया, मेरे मुँह से वाओ निकल गया और शायद उसने सुन लिया और मुझे मुस्कुरा कर फ़िर से आँख मार दी।

उसके मम्मे कमाल के थे, जी चाह रहा था कि उन्हें चूस चूस के निचोड़ दूँ !

पर हाय री मेरी मजबूरी ! मेरी बीवी …

अब तो उसका रोज का काम था मेरे सामने झुक झुक कर अपने मम्मे दिखाना सफाई के बहाने !

मैं भी मौका देख कर उसे छेड़ देता था पर अफ़सोस कुछ कर नहीं पाता था।

शायद यही सोच कर खुश होता था कि समय बड़ा ही बलवान होता है।

खैर ! वापिस अपनी कहानी पर आते हैं !

जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने उसकी पीठ पर हाथ दे मारा..

आ..ओ..ह ! एक प्यारी सी आवाज आई।

वो बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- तुझे छेड़ रहा हूँ !

मेरी पहली कहानी मै आपके लिए पेश कर रहा हूँ, ‌‍मै 23 साल का लड़का हूँ, मुम्बई के पास के पालघर तालुका में रहता हू। मेरा घर गांव में है। यह...

रूपा के साथ पहला अनुभव

मेरी पहली कहानी मै आपके लिए पेश कर रहा हूँ, ‌‍मै 23 साल का लड़का हूँ, मुम्बई के पास के पालघर तालुका में रहता हू। मेरा घर गांव में है।

यह कहानी दो साल पहले की है। मेरे घर में हम सब संयुक्त परिवार में रहते हैं। मेरे चाचा ने छोटे बच्चे के देखबाल के लिए एक लड़की को रखा हुआ था। चाचा-चाची दोनों काम पर जाते थे और मेरे मम्मी-पापा भी काम पर जाते हैं। घर में सिर्फ दादा-दादी ही होते हैं इसलिए मैं हमेशा छोटू से मिलने के लिए या खेलने के लिए वहाँ अक्सर जाता था। उस नौकरानी का नाम रूपा था, उम्र 19-20 साल होगी, दिखने में साधारण पर उभार ऐसे थे कि कामदेव ने खुद तराशे हों।

मेरे मन में उसे पाने की इच्छा जागृत हुई, वो हमेशा मुझे देख कर शरमा कर हंसती थी। मैं चाचा के कम्प्यूटर पर हमेशा बैठा करता था लेकिन सिर्फ पढ़ाई या गाने सुनने के लिए।

मुझे एक ख्याल आया, मैंने सुबह चाचा के कम्प्यूटर पर एक अंग्रेजी फिल्म लगाई। रूपा उधर ही छोटू के साथ खेल रही थी। वो भी फिल्म देखने लगी।

बाद में छोटू को सोना था, इसलिए रूपा बोली- आवाज कम कर दो !

मैंने फिल्म बंद कर दी और कहा- मैं ऊपर टीवी देख लूँगा ! तुम छोटू को सुला दो।

उसने कहा- ठीक है ! पर मझे भी टीवी देखना है।

मैं बोला- तुम छोटू को सुलाकर उपर आ जाना।

वो बोली- ठीक है।

मैं अपने बेडरूम में आया, टीवी लगाकर उस पर फ़ैशन चैनल जो लॉक था, अनलॉक कर दिया और रूपा का इंतजार करने बैठ गया।

थोड़ी देर बाद रूपा आई, मैंने उसे अपने पास बाजू में बैठने को कहा तो वो बैठ गई।

तब मैंने कहा- क्या देखोगी?

उसने कहा- आप ही देखो जो देखना है।

मैंने कहा- जो मैं देखूँगा वो तुम्हें शायद पसंद न आए !

उसने सिर्फ हंस कर मेरे तरफ देखा तो मैंने फ़ैशन चैनल लगा दिया और देखने लगा। उसके चेहरे पर शर्म साफ दिख रही थी।

वो कुछ बोल नहीं रही थी।

टीवी पर बिकनी पहने मॉडल आई तो तभी मैंने कहा- तुम हंस क्यों रही हो?

तो दोस्तो, अब मैं अपनी नई कहानी लेकर आया हूँ अपने दोस्त की जिसका नाम लांघा है, लांघा भी मनाली में रहता है, बहुत बड़ा रंडीबाज़ है वो ! क्य...

लांघे की लाजो

तो दोस्तो, अब मैं अपनी नई कहानी लेकर आया हूँ अपने दोस्त की जिसका नाम लांघा है, लांघा भी मनाली में रहता है, बहुत बड़ा रंडीबाज़ है वो ! क्या बताऊँ उसके बारे में !

पेशे से वो ठेकेदार है। ठेकेदार है तो जाहिर सी बात है कि उसके पास मज़दूर भी होगें।

एक दिन की बात है कि वो अपने मज़दूरों से काम करवा रहा था। कि उसकी नज़र एक काम करने वाली पर पड़ी। उस दिन मैं भी उसके साथ मैं था।

वो थी ही सच में बड़ी सेक्सी !

तभी लांघा बोलने लगा- यार, यह मिल जाए तो मज़ा आ जाये !

थी भी वो 24-25 साल की।

उसे पास बुला कर कुछ देर लांघा ने उसके साथ बात की और उसके बाद हम उसकी सफारी में चले गए। शाम हो गई थी, तभी हमें हमारा दोस्त इन्घा मिल गया और हम ऐपल वैली चले गए पैग मारने के लिए !

तीन तीन पैग पीने के बाद हमें चढ़ गई और लांघा उसके ख्वाब लेने लगा। उस लड़की का नाम लाजो था। इन्घा भी बड़ा खुश हो रहा था लांघा की बातें सुन कर !

रात के साढ़े ग्यारह हो गए थे, हम लोग रात का खाना खाकर चले गए।

लांघा के खुरापाती दिमाग में अभी भी वो बिहारन लगातार घूम रही थी, वो सोच रहा था कि मैं कैसे उसकी लूँ?

सुबह हम लोग मिले और उसके मुँह पर फिर वही बात थी। लाजो की ! इन्घा भी खुश हुए जा रहा था !

उसके बाद वो अपने काम पर चला गया। आज उसकी डार्लिंग लाजो काम पर नहीं आई थी तो उसने अपने मुंशी हीरू से पूछा- अबे ओये हीरू ! वो लाजो कहाँ है?

पाठक कृपया ध्यान दें कि यह लेस्बियन सेक्स स्टोरी काल्पनिक है। इसका किसी यथार्य या किसी से कोई सम्बन्ध नहीं है, अगर कोई सम्बन्ध होता है तो...

जोधपुर की भाभी संग पहला लेस्बीयन सैक्स

पाठक कृपया ध्यान दें कि यह लेस्बियन सेक्स स्टोरी काल्पनिक है। इसका किसी यथार्य या किसी से कोई सम्बन्ध नहीं है, अगर कोई सम्बन्ध होता है तो वो एक संयोग मात्र होगा।

दोस्तो, मेरा नाम पायल जैन है और मेरी उम्र 20 साल है, मैं जोधपुर की रहने वाली हूँ। यह मेरे जीवन में सेक्स की पहली घटना है, मेरा पहला लेस्बियन सैक्स अनुभव है।

यह तब की बात है जब मैं पढ़ती थी और हमारे पड़ोस में एक बहुत ही अच्छी भाभी रहती थी, उनका नाम पूजा था, उनकी उम्र उस समय करीब 30 साल की थी। वो बहुत ही सुन्दर थी एवम् उनका शरीर भी एकदम फिट एवम् आकर्षक था। शायद इसी लिए हमारी कॉलोनी के पास वालों की नजर उस पर बहुत गंदी थी।

दोस्तो, उनके अंदर बहुत सारी अच्छाइयों के साथ साथ उनका व्यवहार भी सभी के लिए बहुत अच्छा था और उस वजह से वो मुझसे बहुत हंस कर अपनी सभी तरह की बातें खुल कर कहा करती थी और इस वजह से मेरी उनसे मेरी बहुत ही कम समय में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी और हम दोनों का हर कभी एक दूसरे के घर पर आना जाना लगा रहता था।

उनके पति एक सरकारी विभाग में बहुत बड़े अधिकारी थे इसलिए वो दिन के समय और कभी कभी तो कई दिनों तक बिल्कुल अकेली रहती थी इसलिए मैं स्कूल से आने के बाद अक्सर दोपहर के समय में उनके पास चली जाती थी और उसके बाद ​अक्सर दोपहर के समय में उनके पास चली जाती थी फिर हम दोनों के बीच बहुत सारी हंसी मजाक और गपशप चला करती थी।

एक दिन मैं दोपहर के समय उनके घर चली गई तो मैंने देखा कि वो उस समय एक गाउन पहने हुए थी और उस गाउन में से उनकी ब्रा पेंटी और शरीर का बहुत सारा हिस्सा साफ साफ नजर आ रहाँ था. मैंने उनसे पूछा- क्या बात है भाभी, आज आप अभी तक नहाई नहीं हो?
तो उन्होंने कहा- आज मैं ब्यूटी पार्लर जाने की सोच रही हूँ.
मैंने उनसे पूछा- क्यों?
तो उस समय मुझे अपनी बाजू दिखाते हुए वो मुझसे कहने लगी- मुझे वैक्सिंग करानी है, देखो मेरे बाल बहुत ज्यादा बड़े हो गये हैं।
मैंने उनको कहा- क्या मैं आपकी कुछ मदद कर दूँ?
वो पूछने लगी- तुम क्या मदद करोगी?
मैंने कहा- आप जो भी कहोगी मैं आपकी उस काम में मदद कर सकती हूँ.
उन्होंने कहा- हां!
और उन्होंने मुझे उनकी वेक्सिंग में मदद के लिए बोला.

बिस्तर पर मेरी आँख खुली तो मम्मी मुझसे पूछने लगीं कि बेटा ये सब कैसे हुआ? पापा डॉक्टर साहब से बात कर रहे थे. मैंने मम्मी की तरफ देख कर ...

बड़ी बहन की प्यार भरी चुदाई

बिस्तर पर मेरी आँख खुली तो मम्मी मुझसे पूछने लगीं कि बेटा ये सब कैसे हुआ?

पापा डॉक्टर साहब से बात कर रहे थे. मैंने मम्मी की तरफ देख कर बोला- मम्मी मैं ठीक हूँ.. अभी बात करने का मन नहीं हो रहा, बाद में सब बताऊंगा.
मेरी मम्मी ने भी कहा- ठीक है बेटा तू आराम कर.. मैं जाती हूँ.
जाते जाते उन्होंने कहा- सोनी बेटा, नवीन का ख्याल रखना.

मेरी नज़र अचानक सोनी पर पड़ी, जो मेरे पीछे दीवार से चिपक कर खड़ी थी और बहुत रो रही थी.
मेरी माँ के जाने के बाद वो तुरंत मेरे पास आई और उसने मेरे हाथ को चूमते हुए कहा- नवीन तुमने ऐसा क्यों किया? ऐसा भी कोई करता है क्या भला?
मैं- अरे मुझे कुछ नहीं हुआ है.. बस थोड़ी सी चोट ही तो लगी है.. दो चार दिन में ठीक हो जाएगी.
सोनी- नवीन सॉरी मैंने उस टाइम तुम्हारी बात नहीं सुनी. लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे तो एक पल के लिए लगा जैसे मैंने तुम्हें खो दिया हो.. यू आर माय बेस्ट फ्रेंड.
मैं- ठीक है सोनी तुम रोना मत.. मुझे नींद आ रही है, मैं सो रहा हूँ.. तुम भी सो जाओ.
सोनी- ठीक है पर किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बुला लेना.
मैं- हां ठीक है बाय गुड नाइट.

मैं सो गया.

जब अगली सुबह मेरी नींद खुली तो सोनी सामने चाय लेकर खड़ी थी. उसे देख कर मैं खुश हो गया और गुड मॉर्निंग बोला. उसने मुझे चाय दी और मेरे बाजू में आकर बैठ गई.

मैंने पूछा- आज तुम्हारा कॉलेज नहीं है क्या?
तो उसने कहा कि उसने कॉलेज से 4 दिन की छुट्टी ले ली है और वो इन 4 दिनों में मेरी देखभाल करेगी.

मैं तो बहुत खुश हो गया. अब तो वो हमेशा मेरा ख्याल रखने लगी. मैं कोई भी काम बोलूँ तो फटाक से कर देती.
अब मुझे बहुत मज़ा आने लगा था.

इसी तरह एक दिन वो मेरे बाजू में बैठ कर मुझसे बातें कर रही थी और मम्मी किचन में खाना बना रही थीं. उस दिन उसने क्रीम कलर का ड्रेस पहना हुआ था और जस्ट अभी अभी नहा कर आई थी. उसके बाल खुले थे, मैं तो उसकी खुशबू से एकदम पागल सा हो रहा था.
मैं खुद को एक अलग ही दुनिया में महसूस कर रहा था. मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी गांड पे रखा और धीरे धीरे फिराने लगा.
उसने मेरे हाथ पकड़ लिया और ज़ोर से साइड में करके चली गई.

मैंने भी सोच लिया था कि अब तो जो हो सो हो, पर अब इसे इस तरह से नहीं जाने दूँगा. शाम को जब वो मेरे लिए नाश्ता लेकर आई तो मुझे नाश्ता देकर मेरे सामने बैठ गई.
मैंने उससे कहा- वहां क्यों बैठी हो, मेरे पास आ कर बैठो.
उसने कहा- नहीं मैं नहीं आऊंगी.
मैंने कहा- ठीक है, फिर ले जाओ ये नाश्ता.. मुझे कुछ नहीं खाना. अगर ऐसा ही था तो फिर मर जाने देना था ना मुझे.. फिर क्या करने ले आए इधर घर पर. वैसे भी हर किसी को बस मुझसे ही तो प्राब्लम है.

दोस्तो, मेरा नाम सैम है, मेरी उम्र 26 साल है, मैं औसत डीलडौल का गोरा चिट्टा लड़का हूँ और पिछले कई सालों से मैं दिल्ली में रहता हूँ। मैं ...

बीवी की चुदाई गैर मर्द से

दोस्तो, मेरा नाम सैम है, मेरी उम्र 26 साल है, मैं औसत डीलडौल का गोरा चिट्टा लड़का हूँ और पिछले कई सालों से मैं दिल्ली में रहता हूँ।
मैं कई सालों से देसी चुदाई कहानी का पाठक हूँ लेकिन मैं पहली बार अपनी आपबीती आपको बताना चाहता हूँ जो पिछले साल मेरे साथ घटित हुई। मुझे फ्री में मिले सेक्स की कहानी पढ़ा कर मजा लीजिये.

बहुत ही शर्मीला लड़का होने के कारण मैं कभी भी किसी लड़की या महिला के साथ सेक्स करने काम मौका पाने मे असमर्थ रहा। अपने अकेलेपन और अपने लंड को हाथ से हिलाते हिलाते तंग पाकर मैंने कई अडल्ट साइटों पर आई डी बना कर कपल और महिलाओं से बात करने की सोची तो 6-7 महीनों के बाद मुझे रमन सिंह जी मिले, उन्होंने बताया कि कैसे वो अपनी पत्नी को किसी और से अपने सामने चुदवाना चाहते हैं और अपनी प्रतिष्ठा को भी समाज में बनाए रखना चाहते हैं ताकि किसी और को पता नहीं चले।

बहुत दिनों तक बात करने के बाद मुझे रमन सिंह जी ने अपनी तस्वीर भेजने के लिए कहा। मैंने अपने लंड की तस्वीर भेजी जो उन्हें और उनकी पत्नी को बहुत पसंद आई।
मैं बताना चाहता हूँ कि मेरा लंड न ही 10 इन्च या 12 इन्च का है बल्कि यह 7 इन्च का हट्टा कट्टा और तन्दुरस्त है।

उन्होंने मुझे मुलाकात के लिए अपने घर बुलाया जो कि एन सी आर में ही बड़ा शहर है। मैंने वहां पहुंच कर उन्हें फोन किया और वो मुझे लेने के लिए बस स्टैंड पर आ गए। उनकी उम्र 45 साल थी और उन्होंने मुझे बताया कि उनकी पत्नी की उम्र उनसे कम है।

उनके घर जाने के बाद हमारी मुलाकात इस कहानी की नायिका अनामिका से हुई जो 37 साल की पटाखा गोरी 36-30-38 के जबरदस्त हुस्न की मल्लिका है। उन्होंने कसा हुआ ब्लैक पंजाबी सूट और पटियाला सलवार और होंठों पर लाल लिपस्टिक वाली मुस्कान देखकर मेरी सांस रूक सी गई और मैंने वहीं खड़े खड़े कामदेव का धन्यवाद देते हुए एकदम से टन्नाये लंड को पैन्ट में ठीक किया।
वो मुझे हैलो और बैठने का बोल कर मुस्कराती हुई रसोई में अपनी सेक्सी गांड मटकाती हुई चली गई।

रमन जी ने हम तीनों के लिए पेग बना लिया तब तक अनामिका ने टेबल पर सलाद रखते हुए अपने चुचों की झलक दिखाते हुए आंख मार कर मेरे पास बैठ गयी।

मेरा नाम संजू है, हरियाणा का रहने वाला हूँ पर पिछले दो साल से दिल्ली में रह रहा हूँ। मैं अन्तरवासना को पिछले कुछ महीनों से लगातार पढ़ रह...

खिड़की वाली भाभी

मेरा नाम संजू है, हरियाणा का रहने वाला हूँ पर पिछले दो साल से दिल्ली में रह रहा हूँ।
मैं अन्तरवासना को पिछले कुछ महीनों से लगातार पढ़ रहा हूँ, सोचा मैं अपनी कहानी भी आपके साथ शेयर करूँ।

यह बात चार साल पहले की है जब मैं मास्टर डिग्री के फाइनल इयर में पढ़ रहा था। मैं पेयिंग गेस्ट रहता था। जहाँ पर रहता था, वहाँ सबसे मेरे अच्छे ताल्लुकात बन गए थे।

मेरे कमरे के सामने एक युवा नवविवाहित जोड़ा रहता था। भाभी का क्या कहना, देखने से ही तन बदन में आग सी लग जाती थी ! क्या मस्त मस्त चूचियाँ थी, मस्त मस्त चूतड़ थे !

मैं अक्सर अपनी खिड़की से उनको देख कर मुठ मारा करता था और सोचा करता था कि काश एक बार मौका मिल जाए तो जिंदगी बन जाए।

मैं अकसर उनके घर शाम को चला जाता था, भैया के साथ बातचीत होती थी, तब भाभी पानी का गिलास लेकर आती थी तो उनके हाथ को छूने का मौका मिल जाता था।

हुआ यों कि होली का त्योहार था, भैया को तीन दिन पहले ऑफ़िस के काम से कोलकाता जाना पड़ गया और मेरा भी घर जाने का प्रोग्राम बन गया था तो मैं उस दिन शाम को भैया-भाभी से मिलने के लिए चला गया।

तब भाभी बोली- तेरे भैया तो कोलकाता चले गये हैं मुझे यहाँ अकेली को छोड़ कर !
तो मैंने उसी समय पॉइंट मार दिया- मैं भी बहुत अकेला महसूस करता हूँ, हर रात काटने को आती है, ना ही नींद आती है।
तो भाभी फट से बोली- जब सुबह सुबह मैं काम कर रही होती हूँ तो तुम्हारी खिड़की हल्की सी खुली होती है, तुम मुझे देखते हो?

मैं घबरा गया और खड़ा हो गया, मेरे छोटे उस्ताद भी अपनी पोज़िशन में खड़े थे, भाभी ना जाने कब से नोट कर रही थी मेरी हरकतों को !

मैं हकलाते हुए बोला- नहीं तो भाभी !
भाभी बोली- बनो मत, मैं पागल नहीं हूँ।
तो मैंने बोल दिया भाभी को- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, आपको गले लगाने का मन करता है।
तो भाभी बोली- चलो ठीक है, इस होली पर मिल लेना गले जी भर कर !

मेरी आँखें फटी की फटी रह गई।
मैंने मौका ताड़ते हुए भाभी को बोला- एक ग्लास पानी मिलेगा?

तो भाभी रसोई की तरफ चल पड़ी, मैं दरवाजे के पीछे छिप कर खड़ाअ हो गया। जब भाभी पानी लेकर आई तो मैंने भाभी को पीछे से पकड़ लिया और हड़बड़ाहट में भाभी घूम गई, उनके हाथ से पानी मेरे ऊपर गिर गया तो भाभी बोली- आज ही होली मन गई ये तो !

मैंने बोला- हाँ जी, तो मेरी हग?

टीवी पर आ रहे दृश्य से श्रद्धा को एक झटका सा लगा। उसने अपने पास ही बिस्तर पर बैठे जीजा को झिंझोड़ते हुए कहा- नरेन्द्र ! नरेन्द्र ! देखो !...

मुझ से भूल हुई

टीवी पर आ रहे दृश्य से श्रद्धा को एक झटका सा लगा। उसने अपने पास ही बिस्तर पर बैठे जीजा को झिंझोड़ते हुए कहा- नरेन्द्र ! नरेन्द्र ! देखो !

टीवी पर एड चल रहा था… कल रात मुझ से भूल हुई… सावधानी नहीं ली… मैं गर्भवती होना नहीं चाहती… अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए बहत्तर घंटे के भीतर गोली लें।

नरेन्द्र ने विज्ञापन खत्म होते ही पैरों में चप्पलें डाली और झपट कर मोटर साईकिल पर निकल गया, पास के मेडिकल स्टोर पर पहुँचा।

उसे बोलने की आवश्यकता नहीं पड़ी, स्टोर के काऊंटर के साथ की दीवार पर अनचाहे गर्भ को रोकने की गोली का पोस्टर लगा था। उसने पोस्टर की ओर इशारा कर दिया। फार्मासिस्ट ने एक पैकेट निकाला और नरेन्द्र के हाथ में पकड़ा दिया।

नरेन्द्र जिस तेज गति से मेडिकल स्टोर पर गया था, उसी तेज गति से लौटा। नरेन्द्र ने पैकेट श्रद्धा के हाथ में रख दिया। श्रद्धा ने पैक को खोल कर गोली निकाली और कुछ पल तकने के बाद पानी के साथ गटक ली। गोली निगलते ही उसे राहत महसूस होने लगी।

नरेन्द्र बोला- अब तुम तीन-चार घंटे आराम करो… तुम तीन बजे वाली ट्रेन से चली जाना।

श्रद्धा बिस्तर पर पसर गई। नरेन्द्र भी पास में ही लेट गया। इसी बिस्तर पर ही बीती रात को वे एकाकार हो गए थे।

नरेन्द्र की शादी विद्या से हुई थी। यह बेड शादी में उपहार में मिला था। विद्या के साथ प्रथम रात्रि यानि की सुहागरात इसी पर मनाई… और उसके बाद इसी पर ही मजे से हर रात बीत रही थी।

कुछ माह पहले विद्या अमरावती से डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर नागपुर में एक स्कूल में अध्यापिका लग गई। कुछ दिनों तक अप डाउन किया, मगर इसमें भारी परेशानी हुई तथा जाने आने में ही छह घंटे तक बीत जाते। इसके अलावा विभागीय निरीक्षण की सख्ती भी थी। उसने वहीं पर कमरा किराए पर ले लिया।

विद्या शनिवार को ड्यूटी कर शाम तक घर लौट आती। शनिवार शाम से सोमवार की भोर तक का समय व्यस्तता में बीतता। शनिवार शाम को घर लौटते ही विद्या और नरेन्द्र बाजार जाकर खरीदारी करते, खाते पीते और रात को बिस्तर पर नई प्रेमकथा तैयार करने में जुट जाते। रविवार का आधा दिन घरेलू कामकाज में बीत जाता। उसके बाद दोनों दो तीन घंटे सोकर थकान उतारते। भोजन बनाने खाने के बाद रविवार की आधी रात तक प्रेमकथा दोहराते।

इसके बाद विद्या पुन: ड्यूटी पर जाने की तैयारी में लगती। नरेन्द्र और विद्या करीब तीन बजे बस स्टेंड के लिए घर से मोटर साईकिल पर निकल पड़ते। बस की रवानगी भोर में चार बजे होती तब तक बस के आने का इंतजार करते। बस के इंतजार में खड़े अन्य यात्री विद्या को कनखियों से निहारते रहते। कई युवा तो इतने उद्दण्ड होते कि एकदम पास में आकर घूरते हुए निकलते। उनकी आँखों में शरारत झलकती जो कहती कि आओ, मेरी आँखों में होती हुई दिल में समा जाओ।

कुछ तो पास में आकर नरेन्द्र से टाइम पूछते- भाई साहब क्या बजा है? बस का राइट टाइम क्या है?

हमारे घर में मेरा बड़ा भाई अनुज, भाभी नेहा, मम्मी, पापा और मैं रहते हैं। भाई की शादी दो साल पहले हुई थी। भाभी मेरी ही उम्र की हैं। भाभी क...

भाभी की चिकनी जांघें

हमारे घर में मेरा बड़ा भाई अनुज, भाभी नेहा, मम्मी, पापा और मैं रहते हैं। भाई की शादी दो साल पहले हुई थी। भाभी मेरी ही उम्र की हैं। भाभी का गोरा रंग, बदन 36-28-38, वो बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी हैं। भाई ट्रैवल कंपनी में टूर प्रबन्धन करते थे, कभी कभी वो

एक महीने के लिए टूर पर जाते थे क्योंकि उन्हें लोगों के खाने पीने का इंतज़ाम करना पड़ता था।

एक बार की बात है भाई टूर के साथ नेपाल गए थे, 25 दिनों का टूर था, घर में सिर्फ मैं, भाभी, मम्मी, पापा ही थे। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ। उस दिन जब मैं जॉब से घर आया तो पता चला कि मम्मी पापा मामा के घर गए हुए थे और वो अगले दिन आने वाले थे।

मैं जब घर पहुँचा तो नेहा भाभी सो रही थी।
मैं ड्राईंगरूम में बैठा था, थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वो नहा कर बाहर निकली।
वो सिर्फ तौलिये में थी, उनकी घुटनों के ऊपर गोरी गोरी चिकनी जांघें साफ़ नज़र आ रही थी।
वो तोवेल उनकी छाती से थोड़ा ही ऊपर था।

यह देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया, मैंने सोचा कि आज इनको चोदने का मौका मिल जाए तो क्या ही बात हो !

मैं उनके पीछे पीछे उनके बेडरूम में चला गया, मैंने देखा, वो अपना बदन पौंछ रही थी और साथ साथ अपने उरोजों को सहला रही थी और उनकी चूचियाँ एकदम लाल हो रही थी।

मैं भी अपना लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगा।

फिर वो अलमारी की तरफ बढ़ी, तब मैंने उनके चूतड़ देखे ! उफ्फ ! क्या गांड थी ! सोचा अभी जाकर बिना तेल लगाये पूरा लंड अंदर घुसा दूँ !

फिर वो अलमारी से ब्रा निकाल कर पहनने लगी और उसकी मैचिंग पैन्टी भी पहन ली।
काली जालीदार ब्रा और पैन्टी देखने के बाद तो मेरा दिमाग ही ख़राब हो गया। फिर वो साड़ी पहन कर अपने कमरे से बाहर आ गई। उनके बाल अभी भी गीले थे।

प्रिय मित्रो, मैं दीपक 28 साल का हूँ. मैं सिर्फ बुर पीता हूँ और बुर ही खाता हूँ इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है कि बुर पिलाने वाली मेरा लंड प...

कच्ची उम्र में चुत चुदाई का अनुभव

प्रिय मित्रो, मैं दीपक 28 साल का हूँ. मैं सिर्फ बुर पीता हूँ और बुर ही खाता हूँ इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है कि बुर पिलाने वाली मेरा लंड पीयेगी या नहीं पर मुझे बुर चाटना अच्छा लगता है और मैं करता हूँ. मैं देसी चुदाई कहानी  का पिछले 5 सालों से नियमित पाठक हूँ. पहले पहले तो मुझे सारी कहानियाँ काल्पनिक लगती थी पर पिछले कुछ दिनों से कुछ कहानियाँ वास्तविक लगी तो दिल किया कि मैं भी कुछ आप लोगों से शेयर करूँ, मैं ऐसा नहीं कहूँगा कि आप सच मानो पर जो मैं कहने जा रहा हूँ वो सच हैं.

बात बचपन से शुरू करते हैं जब मैं बहुत छोटा था तो कानपुर में मेरे मकान मालिक की लड़कियाँ मुझे आपने साथ खिलाने के लिए लेकर जाया करती थी और अकेले कमरे में मेरे सामने सलवार खोल कर बुर दिखाती थी और कहती थी कि इसमे उंगली डालो, टॉफी देंगी. मुझे नहीं मालूम था कि यह क्या है, बस टॉफी के लालच में कर देता था. पर जब कुछ बड़ा हुआ तो बात समझ में आई तो पुराने माकन मालिक के घर इस लालच में जाया करता था कि मुझे फिर वैसे ही करने को मिलेगा पर अफ़सोस, कभी ऐसा नहीं हुआ.

एक समय आया कि मैं गाँव में आकर रहने लगा. गाँव में बहुत सारी भाभियाँ थी, बस मुंह से मजाक हुआ करता था मगर कभी और कुछ कहने की हिम्मत नहीं पड़ती थी. एक दिन मेरे दोस्त ने कहा- मार्केट से आते समय कंडोम लेकर आना!

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ- बात क्या है?
उसने कहा- शाम को बताऊँगा.
मैंने कंडोम लाकर दे दिए, अगले दिन उसने बताया कि उसने अपनी बड़ी देसी भाभी को चोद दिया, जिसके पहले से एक बच्चा था.

चूंकि वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था, हम लोग एक दूसरे के घर बहुत अच्छे से आते जाते थे, मेरे घर पर सिर्फ दादा और दादी थे और उसके घर पर बड़ी भाभी, मम्मी, पापा थे उसके भैया बम्बई में थे जो 6-8 महीने के बीच में 5-7 दिन के लिए आते थे. और गाँव में सिर्फ उसके ही घर पर टीवी था, देर रात तक प्रोग्राम देखते थे, मगर कभी कुछ ऐसा नहीं लगा. अब तो मेरा भी दिमाग ख़राब हो रहा था, जब भाभी उससे चुद सकती है तो मुझसे क्यूँ नहीं? अब भाभी को दूसरी नजरों से देखने लगा और मेरा दोस्त साला रोज रात की कहानियाँ बताया करता था.

अब तो लण्ड में ज्यादा खुजली होने लगी थी. एक बार रात में टीवी देखते समय लाइट गई तो मैंने भाभी की चूची छू ली तो उसने कुछ नहीं बोला, मेरी हिम्मत ज्यादा हो गई.

मैं दिल्ली से हूँ। मैं पेशे से इंजीनियर हूँ पर आजकल मुंबई के अंधेरी में रहता हूँ। मैंने अन्तवार्सना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं पर मैं आप...

बारिश की रात भाभी के साथ

मैं दिल्ली से हूँ। मैं पेशे से इंजीनियर हूँ पर आजकल मुंबई के अंधेरी में रहता हूँ। मैंने अन्तवार्सना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं पर मैं आपको एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।
यह कहानी मेरी और मेरी भाभी की है। मेरी उम्र इस समय 28 साल है और भाभी की 30 साल। उसका कद 5’3′ रंग गोरा और बदन 36-24-36 है।

बात उस समय की है जब मेरी उम्र 24 साल की थी।
मेरे भैया की नौकरी छुट गई थी और वो नौकरी की तलाश कर रहे थे।

मेरे घर वालों ने भैया को मेरे पास भेज दिया। कुछ दिनों में भैया को नौकरी मिल गई, वो भी मुंबई में सेट हो गये और कुछ दिनों बाद भाभी भी आ गई।
भाभी के आ जाने से अब घर व्यवस्थित हो गया। सब कुछ अच्छे से चलने लगा। साथ रहने से अब हम काफी खुल गये थे, हम हर विषय पर बात कर लेते थे।

पर मैं एक बात बता दूँ, मुझे भाभियाँ ही ज्यादा पसंद आती हैं क्योंकि उनमें काफी निखार आ जाता है।
पहले मेरे मन में ऐसा कोई विचार नहीं था अपनी भाभी को चोदने का। भैया को आफिस के काम से एक महीने के लिये विदेश जाना था।

उस रात मैंने भैया को सेक्स करते देखा, बस उसी दिन से भाभी का नंगा बदन मेरे दिमाग में घूम रहा था।
बारिश का मौसम था, बादल गरज रहे थे और भाभी को अकेले सोने में डर लगता था इसलिए वो मुझे अपने कमरे में सोने के लिये बोली।
मैं एक कोने में सो गया।

एक रात हम सो रहे थे, मुझे पेशाब आया तो मैं उठ कर पेशाब करने चला गया। जब आया तो मैंने देखा कि भाभी की नाईटी ऊपर उठी हुई थी और उनकी जाँघें दिख रही थी।

मैं वही बैठ कर उसकी गोरी जाँघों को निहारने लगा। इससे मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं आँखें बंद करके लेट गया। मैंने अपना एक हाथ उनकी जाँघ पर रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा, कोई प्रतिक्रिया न देखकर मैं समझ गया कि भाभी गहरी नींद में हैं।

मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी चूचियाँ सहलाने लगा, फिर थोड़ा सरक कर उनके पास हो गया और अपना लंड निकाल कर भाभी के चूतड़ों पर लगाने लगा।
ऐसा करते हुए मुझे डर भी लग रहा था कि भाभी जाग न जाये। लेकिन मुझे ऐसा करने में बहुत मजा भी आ रहा था। फिर मैंने उनकी नाईटी को ऊपर तक सरका दिया, उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी।

मैं उनके साथ चिपक गया, मेरा लंड उनकी पैंटी के ऊपर उसकी गांड की दरार पर लगने लगा। मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा। फिर वो थोड़ा हिली और पीठ के बल लेट गई।
उनके मम्मे मेरे सामने थे, उनके गुलाबी चुचूकों को मैं अपनी दो उंगलियों में लेकर मसलने लगा। फिर मैंने एक चुची को मुँह में ले लिया और अच्छी तरह से चूसने लगा। क्या मजा आ रहा था !

अब भाभी जाग चुकी थी और मेरे बालों में हाथ फेर रही थी। फिर मैंने भाभी की नाईटी निकाल दी। अब मैं उनके होंठ चूसने लगा और उनकी चूचियों को अपने हाथों से दबाने-मसलने लगा।

अब मैं बात करता हूँ अपने जीवन की एक ऐसी घटना की.. जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। बात तब की है.. जब मैं इंटर में था। मेरे एक भैया हैं मैं उनक...

अनजान भाभी का दिल मेरे लण्ड पर

अब मैं बात करता हूँ अपने जीवन की एक ऐसी घटना की.. जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।
बात तब की है.. जब मैं इंटर में था।
मेरे एक भैया हैं मैं उनके साथ काम करने लग गया।

एक बार वो मुझे किसी के घर ले गए, भैया ने बताया कि वे उनके अच्छे दोस्त हैं।
हम दोनों उनके घर गए.. घर की घंटी बजाई.. तो एक बहुत सुंदर औरत ने दरवाजा खोला.. हम अन्दर गए।

उस औरत का फिगर 34-28-36 का था। उसके मम्मे.. पतली कमर.. उठी हुई गाण्ड तो ऐसी थी कि देखते ही लण्ड खड़ा हो जाए। उसका रंग दूध जैसा सफेद था। उसका व्यवहार भी बहुत अच्छा था।

चूंकि हम उसके पति से मिलने गए थे.. तो पूछा कि वो कहाँ हैं?
वो बोली- वो बाहर गए हैं.. उनको आने में एक-दो दिन लगेंगे।
हम लोग चल दिए।

उसने मेरा मोबाइल नम्बर माँगा।
मैंने पूछा- क्यों?
तो उसने कहा- तुम्हारे भैया आ जाएँगे तो तुम्हें फ़ोन करूँगी।
मैंने अपना मोबाइल नम्बर दे दिया और हम चले आए।

दो दिन बाद रात को ग्यारह बजे एक नए नंबर से फ़ोन आया, मैंने रिसीव किया.. तो एक लड़की बोली। उसने कहा- आप सूरज बोल रहे हैं?
मैंने कहा- जी हाँ.. आप कौन?

तो उसने अपना नाम ज्योति बताया। थोड़ी देर बात करके उसने कहा- तुम अगर किसी से ना कहो.. तो तुम्हें एक बात बताऊँ?
मैंने कहा- बोलो.. मैं किसी को नहीं बताऊँगा।
तो वो मुझसे बोली- मैं तुम्हें पसंद करती हूँ.. क्या तुम मुझे पसंद करते हो.. अगर हाँ.. तो अभी मेरे घर आ जाओ।
मैंने फ़ोन रखा और जल्दी से तैयार होकर माँ से कहा- मैं दोस्त के घर जा रहा हूँ।

अगले 4 दिनों तक सब नॉर्मल रहा क्योंकि मेरा पीरियड आ गया था तो मैंने बॉस को पार्टी के लिये मना कर दिया। अनु को न्यू पोस्ट मिल गयी थी तो वो...

बॉस के साथ पार्टी

अगले 4 दिनों तक सब नॉर्मल रहा क्योंकि मेरा पीरियड आ गया था तो मैंने बॉस को पार्टी के लिये मना कर दिया। अनु को न्यू पोस्ट मिल गयी थी तो वो उसमें बिज़ी हो गया और मैं भी अपने ऑफ़िस के कामों में बिज़ी रही।

फिर बॉस ने फ्राइडे की शाम को पार्टी की बात कही तो मैंने सोचा फ्राइडे में पार्टी करना ठीक रहेगा। सैटरडे की छुट्टी है तो मैं आराम कर लूंगी।
फिर मैंने ऑफ़िस में अपनी 2 सहेलियों को और 2 लड़कों को बुला लिया, बॉस को बोल दिया आने को और अनु को फ़ोन करके बोल दिया आने को पार्टी में!
अब ऑफ़िस से शाम को जल्दी अपने फ्लैट पर आ गयी और पार्टी की तैयारी करने लगी।

शामम को 7 बजे सारे दोस्त आ गये। कोई फ्लावर बुके तो कोई कुछ और गिफ्ट लाया था।
अनु ने मुझे एक ड्रेस गिफ्ट की जो बहुत अच्छी थी। मैंने अनु से सभी लोगों को मिलवाया, सबको बताया कि ये मेरा बॉयफ्रेंड है।
उस टाईम तक बॉस नहीं आये थे।

तो हम लोग मिलकर बात कर रहे थे, कि डोर बेल बजी और बॉस आ गये। उनके हाथ में एक गिफ्ट था जो मैंने ले लिया और रख दिया।

फिर सब लोगों ने मिल कर बातें की, खाया पीया और डांस किया। फिर रात को 12 बजे तक सब लोग चले गये। अनु भी चला गया।

अब मैंने सभी कपड़े निकाल दिये और नंगी होकर लेट गयी। और ब्लू फिल्म देख कर अपनी चूत में उंगली करने लगी।
इतनी देर में डोर बेल बजी तो मुझे लगा कि अनु आ गया मुझे चोदने के लिये!
तो मैंने ट्रांस्परेन्ट सी नाईटी पहन ली और दरवाजा खोलने के लिये गयी।

जैसे ही मैंने दरवाजा खोला मैं देख कर दंग रह गयी, मेरे बॉस थे दरवाजे पर… और उनके हाथ में एक शैम्पेन की बोतल थी।
अब मेरे पास कुछ नहीं था जिससे मैं खुद को छिपा सकूँ। और बॉस भी चकित से होकर मेरी चुची और निप्पल को देख रहे थे।