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मेरी इस रियल पोर्न स्टोरी में आपने अब तक पढ़ा हमारे घर में इंजीनियरिंग का छात्र अर्जुन किराये पर रहता था. वो रात में मेरे कमरे में आकर मेर...

पोर्न स्टोरी : मेरी पहली चूत चुदाई के हसीन पल-2


मेरी इस रियल पोर्न स्टोरी में आपने अब तक पढ़ा हमारे घर में इंजीनियरिंग का छात्र अर्जुन किराये पर रहता था. वो रात में मेरे कमरे में आकर मेरे कमसिन बदन से खेलता था, मेरी बुर भी उससे चुदने के लिए कुलबुलाने लगी थी. मैंने अपने तरीके से उससे इस बाबत बात करनी शुरू कर दी.

मैंने सोचा यही एक आखिरी मौका है. मैंने रात को अर्जुन को अपने कमरे में बुलाया और ऐसे ही बातें करने लगी कि एग्जाम कैसे गए और आगे क्या करने का मन है.
बातों बातों में मैंने उससे कहा कि तूने तो मुझे गुरु दक्षिणा दी ही नहीं.
उसने कहा- आप कुछ भी मांग लो दीदी.
मैंने कहा- हाँ हमें तो माँगना ही पड़ेगा तू तो बिना मांगे ही ले लेता है.
वो थोड़ा घबराया और बोला- क्या मतलब दीदी.. मैं समझा नहीं?

अर्जुन के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी थीं.

अब आगे..

मैंने कहा- इतना सीधा बनने की कोशिश ना कर. पिछले एक महीने से ये जो सब चल रहा है ना.. मैं सब जानती हूँ.
उसने बोला- क्या दीदी?
वो अब ज्यादा डरने लगा.
मैंने कहा- वो बेहोश करने वाली दवा की बोतल किसने दी तुझे?
“बेहोश करने वाली दवा…? नहीं दीदी मैं बेहोश करने वाली दवा नहीं लेता.”
मैंने कहा- तो साले मुझे क्यों दे रहा था.

वो अब एकदम चुप था और आँखों में थोड़े से आंसू आ गए.



मैंने कहा- अभी भी याद नहीं आया क्या और मैंने वो वीडियो प्ले कर दिया.
वो अब बड़े बड़े आंसू रोने लगा और मेरे पैरों में गिर के गिड़गिड़ाने लगा. अब उसे लगा कि वो बुरी तरह फँस गया है. मैंने अगर ये वीडियो पुलिस को दे दिया तो उसका कैरियर बर्बाद हो जाएगा. उसने बताया कि उसका एक दोस्त है जिसने ये दवा का पाउडर दिया था और बोला था लड़की को किसी भी चीज़ में मिला कर पिला दे. पर ज्यादा हरकतें मत करना नहीं तो लड़की उठ जाएगी.

शायद इसलिए उसने मुझे नहीं चोदा था.

मैंने कहा- एक शर्त पे तुझे छोडूंगी.
उसने कहा- कुछ भी बोलो दीदी पर मुझे माफ़ कर दो.
मैंने कहा- तूने जो काम शुरू किया है वो खत्म कर के जा. तीन दिन बाद तुझे जाना है, तो अब तीन दिन तक तू मुझे रोमांटिक स्टाइल में चोदेगा.. और जैसा मैं कहूँगी वैसा करेगा.

उसकी तो जैसे बांछें खिल गई, वो एक दम से तैयार हो गया.

रात को 11 बजे वो मेरे कमरे में आया और जैसा मैंने कहा था वो कंडोम ले के आया था.

जैसे ही वो दरवाजे पे आया, मैं उसके गले लग गई और बोली- अर्जुन आज डर नहीं.. मुझे अपनी गर्लफ्रेंड की तरह प्यार कर.. मुझे जन्नत की सैर करा दे.

इतना सुनते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और मेरी आँखों में देखते हुए बोला- जानेमन, हम तो तुम्हें 2 साल से चोदना चाहते थे, पर बिना तुम्हारी मर्ज़ी के नहीं. अब तो तुम्हें ये तीन दिन ज़िंदगी भर याद रहेंगे.

आने वाले ये तीन दिन मेरी ज़िन्दगी के सबसे हसीन लम्हे थे. मेरी सुहागरात से भी ज्यादा.

उसने मुझे गोद में उठाए हुए बेड पे लाकर बिठा दिया. अब वो मुझे घूरे जा रहा था. मेरे करीब आ कर उसने मेरे माथे में एक लंबा किस किया. अपनी उंगलियां मेरे बालों में फिराने लगा. मेरे माथे, फिर मेरी आँखों को किस किया और धीरे धीरे गालों को चूमा.
मेरी धड़कनें बढ़ने लगी थीं. मैंने घर पर पहनने वाली एक टी-शर्ट और लोअर पहना था. अर्जुन ने मेरे पूरे चेहरे को बहुत सारे चुम्बनों से भर दिया. मैं तो इतने में ही पूरी तरह से नीचे से गीली हो गई थी.

जब होंठों को किस करने की बारी आई तो मेरे ठोड़ी पे किस किया और कंधे की तरफ बढ़ने लगा. मैं उसे लिप किस करने को और भी बेताब हो रही थी. मेरी आँखें इस दौरान बंद ही थीं. उस मदहोशी का मजा कुछ और ही था.

उसने अपने मोबाइल में कोई इंस्ट्रूमेंटल रोमांटिक गाना लगा दिया था. उससे माहौल और भी रंगीन और हॉट हो रहा था.

वो जब भी मेरे होंठों के पास आता, तो गर्म गर्म सांसें छोड़ देता. मैं अब तड़पने लगी थी. अब जैसे ही वो मुझे तड़पाने मेरे होंठों के पास से गुजरा तो मैंने ही उसे पकड़ के दीवानों की तरह उसे चूमने लगी.
सच में लिप किस का मजा ही कुछ और होता है.

अब वो मेरे होंठों को कभी चूमता कभी चूसता और कभी काट भी देता. मैं तो हर पल के मज़े ले रही थी. अब होंठों से आगे बढ़ते हुए उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी और हर तरफ घुमाने लगा. मैंने भी वैसा ही किया, हम दोनों अब फ्रेंच किस कर रहे थे. कभी एक दूसरे की जीभ को चूसते कभी चाटते. वाऊ क्या मजा आ रहा था.

किस करते करते उसने अपना एक हाथ मेरे टॉप के अन्दर डाल दिया और मेरे पीठ को सहलाने लगा. मैं घर में ब्रा नहीं पहनती, बस अन्दर शमीज पहन लेती हूँ.

किस करते हुए उसने अब मुझे बेड पे लिटा दिया और मेरे टॉप को ऊपर खींच कर मेरे मुँह के ऊपर ला कर रोक दिया.

मेरे हाथ अभी भी टॉप में फंसे थे. मेरे हाथ ऊपर की तरफ और टॉप मुँह के ऊपर था.

उसने धीरे से मेरे कानों में कहा- हाथ मत अलग करना जान.
मैंने बस ‘हमम्..’ बोल के रह गई.

वो मेरे बगल में बैठा था. मैं उसे देख नहीं पा रही थी तो पेट में बहुत गुदगुदी हो रही थी कि अब क्या करेगा.

उसने एक उंगली मेरे हाथों से फेरते हुए मेरे मम्मों के ऊपर से होते हुए मेरे पेट पर जाकर रुका. इस सब से मैं बुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी. वो पल नशा सा लग रहा था.

उसने मेरे पेट से अपना हाथ अलग किया. मुझे अब कुछ नहीं पता था क्या होगा.. बस थोड़ी गुदगुदी हो रही थी. अचानक से उसने मेरे पेट को चूम लिया. मेरे पेट और बुर में इतनी तेज़ गुदगुदी हुई कि रहा ही नहीं गया और मैंने हाथ नीचे करके अपने पेट को छुपा लिया. उसने वापस मेरा हाथ पकड़ कर मेरे सर के ऊपर किया और उस बार मेरी शमीज भी खींच के टॉप के साथ ऊपर कर दी. अब मैं ऊपर से पूरी तरह नंगी थी. उसने अपनी हथेली मेरे चूचों पर रखी. उसकी गर्माहट से बहुत अच्छा लगा. मुझसे अब और रहा नहीं गया और उठ कर मैं उससे लिपट गई.. और उसे ताबड़तोड़ चूमने लगी. मैंने उसकी टीशर्ट उतार के फ़ेंक दी.

मुझे उसके सीने में अपने मम्मों को दबाने में बहुत राहत मिल रही थी. दिल की धड़कनों की रफ़्तार तो बढ़ती ही जा रही थी.

मैंने अपनी पैंटी के अन्दर हाथ डाल के देखा तो वो इतनी गीली हो गई थी कि ऐसा लग रहा था जैसे मैंने सू सू कर दी हो. मेरी बुर इतनी चिकनी हो गई थी कि किसी घोड़े का लंड भी अन्दर घुस जाए.

उसने अब मेरे मम्मों को चूसना चालू किया. ऐसा मदहोशी वाला पल था कि मैं बस बेहोश सी लेटी रही. इतने में कब उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया, पता ही नहीं चला.
वो भी अब मेरे सामने नंगा खड़ा था. अब मैंने अच्छे से उसे पूरा नंगा देखा.

मुझे फिर वो ऊपर से नीचे तक चूमने लगा और आखिर में मेरी बुर को निशाना बनाया. अचानक वो मेरी बुर को चाटने टूट पड़ा. हाय बुर चटवाने में जो मजा है वो और कहीं नहीं. कभी मेरे दाने को जीभ से हिलाता कभी पूरी बुर को मुँह में भर के चूसता.
मेरी तो जान ही निकली जा रही थी.

मेरा स्खलन उसी दौरान हुआ, पर वो तो बुर में जैसे जौंक जैसा चिपक गया था. वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. फिर 5 मिनट बुर चाटने के बाद मैं फिर से झड़ने को हो गई. उसकी जीभ के साथ अपनी कमर हिला हिला के उसका साथ दे रही थी. मुझे लगा शायद मेरी सूसू हो जाएगी, मैंने उससे रुकने को कहा पर वो फिर भी नहीं रुका.

अब तो बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था. मैंने खुद को रोका नहीं और मेरा एक और उससे भी बड़ा स्खलन हुआ. इस बार मेरे मुँह से बहुत आवाज़ भी आई.
मैंने रज छोड़ा था सूसू नहीं. मेरी बुर से वाइट वाइट सा कुछ निकला, जिसे अर्जुन पूरा चाट गया.

अब वो थोड़ा रुका.. और वैसे ही लेटे लेटे मुझे नींद आ गई.
थोड़ी देर बाद नींद खुली तो वो मेरे मम्मों को चूस रहा था. जैसे ही मैं उठी उसने अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया.

मैं पहले बाथरूम गई और आते ही साथ उसके लंड के साथ खेलने लगी. मैंने ऐसे लंड चूसा जैसे कि आखिरी बार मिला हो. मैंने पोर्न मूवीज में सब देख लिया था.
वो भी हैरान था कि मैं क्या मस्त लंड चुसाई कर रही थी. उसने अपना पूरा लंड मेरे गले तक घुसेड़ दिया था. वो तो बहुत जल्दी ही ढीला पड़ गया और ढेर सारा माल मेरे गले में ही छोड़ दिया.

हम दोनों थक चुके थे, हमने उठ कर खाना खाया और थोड़ी देर सो गए. जब चुदाई का नशा चढ़ता है तो ज्यादा नींद भी नहीं आती.
वो मेरे बगल में ही सो रहा था. मेरी नींद खुल गई और मुझे लगा मेरे पास ज्यादा वक़्त नहीं है.
ऐसे पल बार बार नहीं आते.

मैंने उसके होंठों पे हल्का सा किस किया. पर वो नहीं उठा, फिर मैं उसके चादर के अन्दर घुस गई और उसका सिकुड़ा हुआ लंड अपने मुँह में ले के चूसने लगी.

उस टाइम छोटी सी नुन्नी थी वो लंड नहीं कहा जा सकता था. जैसे ही मैंने उसकी नुन्नी अपने मुँह में ली, वो उठ गया और अपना चादर अलग फेंक कर लंड चुसाई के मज़े लेने लगा.

मैं कभी उसके गोटियों को अपनी उंगलियों से छूती, कभी जीभ से चाट लेती. फिर उसकी गोटियों को पूरा मुँह में ले के चूस लिया. उसे इसमें बड़ा मजा आया.
उसकी नुन्नी अब लंड बनती जा रही थी. उसने मुझे नीचे पटक दिया. वो मेरे ऊपर चढ़ गया.

मेरे मम्मों को चूसने लगा और अपना लंड मेरी बुर पे सैट करने लगा. मुझे डर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था. वो अपना लंड मेरी बुर में घिसने लगा और ‘आह.. आह..’ की आवाज़ें निकालने लगा. मुझे लगा अब बस किसी भी पल मैं पहली बार चुदने वाली हूँ. मेरी आँखें बंद हो गई थीं. उसने अपने लंड पे कंडोम चढ़ाया और धीरे धीरे लंड घुसाने लगा.

मुझे दर्द होने लगा था. पर लंड बिना रुके अन्दर सरक रहा था. मेरे मुँह से तेज सी सी की आवाज़ निकली तो वो रुका. अभी उसके लंड का टोपा अन्दर ही घुसा था. उसने पूछा- दर्द हो रहा है क्या?
मैंने सर हिला के ‘हाँ’ में जवाब दिया.
वो बोला- जानेमन, पहली बार है थोड़ा दर्द तो सहन पड़ेगा.

ऐसा बोलते ही उसने मेरी कमर पकड़ी और ज़ोर से पूरा लंड अन्दर पेल दिया. दर्द के मारे मेरे आंसू निकल गए और मैं जोर से चीख पड़ी. उई माह्हा… मर गई मैं… ओह… हहा!
उसका लंड अन्दर घुसा था और वो मेरे ऊपर चढ़े चढ़े बोला- बस हो गया.. अब दर्द नहीं होगा.
ये कहते हुए वो मुझे चूमने लगा. वो मेरे होंठों को लॉलीपॉप जैसे चूस रहा था.

थोड़ी देर में मेरा दर्द चला गया और मुझे अपनी बुर में खुजली जैसी होने लगी.

वो अब अपनी कमर धीरे धीरे हिलाने लगा. मेरी खुजली और बढ़ने लगी. मैं उसे दोनों हाथों से जकड़े हुए लेटी थी. अब तो वो तेजी से धक्के मारने लगा.. और मुझे जन्नत में पहुँचाने लगा.

मैंने उसे छोड़ कर अपने हाथ दोनों तरफ फैला कर लेट गई और चुदाई का पूरा मजा लेने लगी. अर्जुन मेरे ऊपर से उठ कर पूरी ज़ोर से धक्के मारने लगा. हर धक्के में मेरी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकल रही थी. हर धक्के में मेरे मम्मे उछल रहे थे.

उसने एक ही पोजीशन में करीब 15 मिनट तक चुदाई की. इसके बाद मेरा स्खलन होने लगा, पेट सिकुड़ने लगा, सर से पैर तक करंट दौड़ गया. ये तो बुर चुसाई से भी अच्छा था.. और वो तो रुक ही नहीं रहा था. इस करंट के साथ साथ उसके धक्के तो सोने पे सुहागा जैसे लग रहे थे. मुझे तो इतने मस्त स्खलन की उम्मीद ही नहीं थी. कुछ धक्के मारने के बाद वो भी झड़ गया.

अब हम दोनों थक गए थे सो सो गए.

ऐसे ही हम दोनों की चुदाई 3 दिन तक चली. तीन दिन बाद मेरे निप्पल सूज गए थे. उनको छूने में भी दर्द हो रहा था. ऐसे चलते चलते मंडे आ गया. आज अर्जुन के साथ अय्याशी का आखिरी दिन था.

शाम को 4 बजे मॉम-डैड आने वाले थे.. तो खाने से पहले आखिरी चुदाई का प्लान था.

मैंने उस वक़्त ऐसी जंगलियों जैसी चुदाई की. मैं बस अपनी बुर फाड़ देना चाहती थी. मैंने चुदाई के टाइम उसे बहुत काटा. उसने भी बदले में ऐसी ताबड़तोड़ चुदाई की कि मैं बेहोश होते होते बची. बहुत मजा आया.

फाइनली चुदाई की छुट्टियां खत्म. मॉम डैड आ गए और रात तक अर्जुन भी चला गया. अर्जुन जाते जाते मुझे एक नई ज़िन्दगी से वाकिफ करा गया.

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