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दोस्तो, मैं आप की प्यारी प्यारी प्रीति शर्मा, आज आप को अपनी एक और हिंदी पोर्न स्टोरी सुनाने आई हूँ। ये पोर्न स्टोरी तब की है, जब मेरी शाद...

हिंदी पोर्न स्टोरी : दुबई में सेक्सी चीत्कार-1


दोस्तो, मैं आप की प्यारी प्यारी प्रीति शर्मा, आज आप को अपनी एक और हिंदी पोर्न स्टोरी सुनाने आई हूँ। ये पोर्न स्टोरी तब की है, जब मेरी शादी को अभी सिर्फ दो ही महीने हुये थे। उस वक्त मेरे हस्बेंड ने अपना बिज़नस शुरू नहीं किया था, तब वो किसी के साथ पार्टनरशिप में काम करते थे। तो नई नई शादी को सेलिब्रेट करने के लिए इनके पार्टनर ने इन को दुबई का एक हफ्ते का टूर पैकेज गिफ्ट किया। हम दोनों बहुत खुश हुये कि चलो फ्री में दुबई घूमने को मिल गया।

अपनी सारी तैयारी कर के हमने फ्लाइट पकड़ी और उड़ गए दुबई को। टूर पैकेज था, तो हमें कहीं कोई दिक्कत नहीं आई, टूर वालों ने ही हमें सब जगह घुमाया। दिन भर हम घूमते, रात को जोर दार सेक्स करते। हर रात ये तीन या चार बार सेक्स करते। दिन में भी जब हमें मौका मिलता तो हम खुल कर रोमांस करते। लिपस्टिक तो मैं लगाती ही नहीं थी क्योंकि पहली बात मेरे अपने होंठ बहुत गुलाबी हैं, दूसरी बात अगर मैं सुबह 9 बजे लिपस्टिक लगाती तो साढ़े 9 बजे तक ये बंदा मेरे होंठ चूस चूस कर सारी लिपस्टिक खा जाता, तो मुझे लिपस्टिक लगाने का कोई फायदा न होता।
इसके अलावा सारा दिन जहां कहीं मौका मिलता ये मेरे मम्मे दबाते रहते, मैं भी मौका देख कर इनका लंड सहला देती।
हमारा हनीमून बहुत ही शानदार गुज़र रहा था।

दुबई में जो शेख रहते हैं, क्या खूबसूरत गोरे चिट्टे लंबे तगड़े नौजवान हैं, और उनकी बेगमें बेशक बुर्के में होती हैं मगर फिर भी जिस्म का अंदाज़ा तो हो ही जाता है कि थैले में कितना सामान भरा है। कभी कभी किसी की सिर्फ आँखें ही देखने को मिलती मगर क्या खूबसूरत आँखें थी उनकी!



टूर के आखरी दो दिन हमें फ्री छोड़ा गया कि अपनी मर्ज़ी से घूम लो, शॉपिंग कर लो, या जो आपका दिल करे।
हम सारा दिन घूम के गोल्डसूक में सोने की दुकानें देखते रहे। इतना सोना मैंने कभी सोचा भी नहीं था, जितना मैंने देखा। बहुत से लोग वहाँ आ जा रहे थे। तभी सामने से दो बहुत ही खूबसूरत औरतें आईं जबकि उनकी सिर्फ आँखें ही दिख रही थी, मगर मेरे पति को पता नहीं क्या दिखा, वो तो उनको घूरने ही लग गए.
और यही बात वहाँ सबसे बुरी मानी जाती है।

उन औरतों के साथ जो आदमी था, उसने इस बात का बुरा मनाया और उसने पुलिस को बुला लिया।
मेरे पति और मैंने बहुत मिन्नतें की मगर वो नहीं माने और हम दोनों को पकड़ कर पुलिस थाने में ले गई।

थाना ही बड़ा शानदार था। पहले तो हमें एक जगह बैठाया गया, वहाँ हम करीब 2 घंटे बैठे रहे मगर कोई पूछने नहीं आया, शाम के 7 बज रहे थे और हम दोनों बड़े परेशान थे कि पता नहीं अब क्या होगा।
हमारे सारे हनीमून का मज़ा किरकिरा हो गया था.

थोड़ी देर बाद एक पुलिस वाला आया और मेरे पति को बुला कर ले गया कि बड़े साहब ने बुलाया है, मुझे वहीं बैठने को कहा गया।
पति के जाने के बाद मैं और भी परेशान हो गई, अब किस को कहूँ, क्या बात करूँ, किस से फरियाद करूँ।

तभी एक लेडी पुलिस वाली आई, मैंने उसे रोक कर अपनी बात कही, उसने मुझे इंग्लिश में समझाया कि चिंता मत करो, मैं कुछ देखती हूँ।
मुझे बैठा कर वो भी चली गई।
चिंता के मारे मुझे भूख प्यास कुछ भी नहीं लग रही थी।

थोड़ी देर बाद एक पुलिस वाला आया और मुझे भी बुला कर ले गया।

एक रूम में दाखिल हुयी, अंदर कुर्सी पर एक शेख अपने लंबे सफ़ेद गाउन और सर वो कपड़ा सा बांधे बैठा था। सामने मेरे पति और दो पुलिस ऑफिसर खड़े थे। मैं भी जा कर उनके सामने बैठ गई।
शेख ने कहा कि उनके पास शिकायत आई है तो उनको कारवाई तो करनी पड़ेगी, और हो सकता है इसके लिए मेरे पति को 3 महीने की कम से कम जेल हो।
मैं तो डर के मारे रोने लगी। मेरे पति भी बहुत घबरा गए, हमने उनसे विनती की कि हम तो बाहर से आये हैं और हमें कोई भी गलत काम जान बूझ कर नहीं किया। मगर वो किसी भी बात को मान ही नहीं रहे थे।

तब मेरे पति ने उस शेख से पूछा कि हमारे बचने और वापिस जाने का क्या रास्ता है, हमें क्या करना होगा।
तो वो शेख मेरे पति को उठा कर दूसरे कमरे में ले गया।

5 मिनट बाद मेरे पति आए, उनके चेहरे पर अब और भी ज़्यादा टेंशन और परेशानी थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोले- साला मादरचोद अपनी औकात दिखा रहा है।

मैंने पूछा- आप पैसे देकर सेटिंग नहीं कर सकते?
वो बोले- अरे यार इनके पास हमारे से ज़्यादा पैसा है, इन्हे अगर शौक है तो विदेशी शराब और विदेशी औरतों का!
मैंने कहा- तो आप बाहर से एक बढ़िया सी शराब की बोतल और एक अंग्रेज़ रंडी इन्हे अरेंज कर दो।
वो बोले- अरे नहीं यार, इस शेख को न विदेशी शराब चाहिए न गोरी रंडी, इसे तो तुम पसंद आ गई हो, बोलता है, एक बार अपनी बीवी के साथ हमबिस्तर होने दो और उसके बाद तुम दोनों आज़ाद हो।
मैं तो उनकी बात सुन कर रोने ही लग गई, अब यार ये तो ज़बरदस्ती का सेक्स था, मैं कोई रंडी तो नहीं थी कि किसी के भी साथ लेट जाऊँ। मगर मेरे पति के बहुत समझाने पर भी वो शेख नहीं माना, और मुकदमा दर्ज करने की धमकी देने लगा।

हमारी हालात तो बहुत ही खराब थी, सुबह 10 बजे हमारी फ्लाइट थी, अब अगर हम इस पचड़े में फंस जाते हैं तो हमारा तो सारा काम ही खराब हो जाना था और बदनामी सारी दुनिया में अलग। कुछ देर सोचने के बाद मैंने कहा- देखो, आप उस से बात करो कि अगर मेरे साथ एक बार सेक्स करने से ये पचड़ा खत्म होता होता है, तो हमें मंजूर है, मगर उसके बाद ये हमें जाने दे, सुबह हमारी फ्लाइट है, एक बार जहाज़ बैठ गए, मुड़ के दोबारा कभी दुबई नहीं आएंगे।

मेरे पति हैरान हो कर बोले- क्या बकवास कर रही हो, क्या भरोसा इन लोगों की बात का, बाद में अगर अपनी बात से पलट गए तो?
मगर मैंने उन्हें कहा- और अगर मुकदमा दर्ज हो गया तो आप तो जेल में जाओगे, मैं अकेली यहाँ क्या करूंगी, वापिस घर कैसे जाऊँगी, और वहाँ जा कर सब को क्या बताऊँगी। कितनी बदनामी होगी, हंसी उड़ेगी हमारी, यहाँ ये है, सब कुछ यहीं दब जाएगा, सिर्फ आपको और मुझे पता होगा, और किसी को नहीं, और हम भी इस सब को किसी बुरे सपने की तरह भूल जाएंगे।

मेरी बात सुन कर मेरे पति उस शेख के पास गए, और उस से बात की।

थोड़ी देर बाद हम दोनों को लेकर पुलिस के दो कर्मचारी शहर से दूर एक होटल में ले गए। वहाँ पहले उस शेख ने हमें खाना खिलाया, और फिर मेरे पति को उन दो अफसरों के पास छोड़ कर मुझे अपने साथ चलने का इशारा किया। मैं अपने पति के सीने से लग कर रो पड़ी।
मगर और किया भी क्या जा सकता था… अपना गुबार निकाल कर मैं उस शेख के पीछे पीछे चल पड़ी। उस शेख को हज़ार बददुआएं देती, अपनी पति को अनगिनत गालियां देती के उसके एक औरत को घूरने की कीमत मुझ को अपनी इज्ज़त से चुकानी पड़ रही है।

ऊपर रूम में जा कर शेख मुझ से इंग्लिश में बोला- बाथरूम में जा कर थोड़ा अपने आप को ठीक करके आओ।
मैं बाथरूम में गई, वहाँ अपना मुंह धोया, अपने पर्स से मेकअप का सामान निकाल कर थोड़ा सा खुद को सेट किया, और जब फिर आईने में अपनी शक्ल देखी तो मुझे अपना चेहरा बहुत गंदा लगा, क्योंकि ये किसी शरीफ घरेलू औरत का चेहरा नहीं था, ये एक रंडी का, एक वेश्या का चेहरा था। बड़ी घिन सी आई, तो मैं बाथरूम से बाहर ही आ गई।

मुझे देख कर शेख उठ खड़ा हुआ- वल्लाह हबीबी, तुम तो और भी सुंदर हो गई हो।
मैं चुप रही।

वो मेरे पास आया, मेरे कंधे पर हल्के से हाथ रख कर मुझे अपने साथ ले गया और बेड पर बैठाया।
“हिंदुस्तानी औरतें सच में लाजवाब होती हैं, हमारे यहाँ तो लड़कियां या तो पतली पतली होंगी, या बहुत ही भारी भरकम। मगर तुमको देखो, बदन पतला मगर काम की हर चीज़ भारी!” कह कर वो हंसा।
मगर मुझे कोई हंसी नहीं आई।

उसके बाद उसने मुझे खड़ा किया और घुमा कर देखा, मेरी कमर, मेरे चूतड़ों को छू कर देखा। मगर मैं मन ही मन में सोच रही थी, जल्दी कर हरामजादे जो पाँच मिनट तुमने लगाने हैं, लगा, अपना पानी निकाल और हमें जाने दे।
मगर वो तो बड़े आराम से मेरा मजा लेने की सोच रहा था।

फिर उसने मुझे अपनी गोद में बैठाया- इधर बैठो मेरी जान, मेरी गोद में बैठो।
मैं उसकी गोद में बैठी तो मुझे अपनी कमर पर उसका लंड महसूस हुआ, क्या इसने इस गाउन के नीचे से कुछ भी नहीं पहना, और अभी तो मैं सिर्फ इसकी गोद में ही बैठी हूँ, और इसका लंड पहले से खड़ा है, और मुझे तो उसका लंड भी ऐसे लगा कि जैसे कोई बढ़िया औज़ार हो।

मुझे गोद में बैठा कर उसने मेरा आँचल मेरे सीने से हटा दिया.
“हाय…” कितनी शर्म आई मुझे इस तरह किसी के सामने अपने आप को बेइज्जत होते हुये। अब साड़ी के ब्लाउज़ का गला गहरा था, और शादी के बाद पति का हाथ फिरने से मेरी छाती पहले से और भी भारी हो गई थी, तो मेरे मेरे फूले हुये मम्मों का बड़ा क्लीवेज दिख रहा था।

उसने अपनी उंगली से मेरे क्लीवेज को हल्के से छुआ- वाह, कितने मुलायम मम्मे हैं तुम्हारे!
वो इंग्लिश में बोला, मगर मैं आपको सारा हिन्दी में लिख कर समझा रही हूँ।

फिर उसने अपने हाथ में मेरा मम्मा पकड़ कर दबाया- उफ़्फ़, तुम तो कयामत हो मेरी जान, कितना सॉलिड मम्मा है तुम्हारा, खूबसूरत, मज़ा आ गया। अब इन्हे बाहर भी निकाल कर दिखाओ। उसने कहा तो मैं अपने ब्लाउज़ के हुक खोलने लगी, एक एक कर के सारे हुक खोल कर मैंने अपना मरून ब्लाउज़ उतारा तो नीचे मरून रंग का ही ब्रा था।

वो शेख देख कर बहुत खुश हुआ- वल्लाह, गोरे बदन पर मरून ब्रा कितना सुंदर दिख रहा है।
उसने मेरे दोनों मम्मे पकड़ लिए और दोनों जोड़ कर मेरा बड़ा सा क्लीवेज बना दिया और फिर उस में अपनी जीभ डाल कर चाट गया।
“लवली” कह कर उसने ब्रा से बाहर दिख रहे मेरे मम्मे को अपने मुंह में लेकर ज़ोर से चूसा, इतने ज़ोर से के जब मेरे मम्मे का वो हिस्सा जो उसके मुंह में था, उसके मुंह से बाहर आया, तो उस पर सुर्ख लाल रंग का निशान पड़ गया।
वो निशान देख कर वो बहुत खुश हुआ, और उसने दो तीन बार और मेरे दोनों मम्मों को ऐसे ही चूसा और मेरे मम्मों पर कई निशान बना दिये।

फिर उसने मुझे दोबारा खड़ा किया और मुझे साड़ी उतारने के लिए कहा। मैंने अपनी साड़ी खोली तो उसने मेरे पेटीकोट के ऊपर से से ही मेरी दोनों जांघों को सहला कर मेरे चूतड़ दबा कर देखे। “महजबीन, तुम तो बहुत ही सुंदर हो, कुदरत का करिश्मा हो।”

फिर उसने खुद अपने हाथ से मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोला, नाड़ा खुलते ही पेटीकोट नीचे गिर गया और मैं ब्रा पेंटी में उस अजनबी शेख के सामने खड़ी शर्म से पानी पानी हो गई। बेशक पहले मुझे वो शेख कोई कसाई लग रहा था, मगर मुझे भी इस काम में मजा आने लगा था और मैंने उसे एक दो बार मुस्कुरा कर भी देखा था।

उसने मेरी कमर को पकड़ कर मुझे अपने पास खींचा और खुद आगे हो कर अपने मुंह मेरी पेंटी से लगा लिया और अपनी जीभ निकाल कर मेरी पेंटी को चाटने लगा।
चाहे कुछ भी था, था तो वो एक मर्द और मैं औरत… तो ज़ाहिर सी बात है कि एक दूसरे के छूने का असर तो होना लाज़मी था।

जब उसने मेरी पेंटी को चाटा तो मेरे तो सारे बदन में झुरझुरी से दौड़ गई, मेरे काँपने से उसने मेरी चूत के ऊपर अपने दाँतों से काट लिया, और मेरी चूत के दोनों होंठ उसने अपने दाँतों में पकड़ लिए, तो एक सिसकारी भर कर मैंने भी उसका सर पकड़ लिया।
शेख को पता चल गया कि मैं भी अब गर्म हो चुकी हूँ तो उसने उठ कर मुझे धक्का दे कर बेड पे गिरा दिया और अपना सर का कपड़ा और गाउन उतार दिया।
सर पर हल्के बाल थे, मगर बदन पर एक भी नहीं। पतला, गोरा मगर कसरती बदन, बहुत सुंदर मसल बने हुये, और नीचे 9 इंच लंबा और सीधा तना हुआ लंड! सच में क्या मस्त लंड था शेख का, मैंने देखा तो खुद ही अपनी टाँगें खोल दी।

शेख ने मेरा एक पाँव पकड़ा और मेरे सेंडल को चूम कर मेरी एड़ी को चाटा और फिर मेरे घुटने तक अपने हाथ से हल्की सी मालिश की. मैंने आनन्द में डूब कर अपनी आँखें बंद कर ली।
फिर ऐसे ही उसने दूसरे पाँव पर किया तो मेरे मुंह से एक लंबी सी “आह…” निकल गई।
“अच्छा लगा तुम्हें?” उसने पूछा।
मैंने हाँ में सर हिलाया।

उसने और भी कई जगह मेरे पाँव को चाटा, चूमा, मेरी टाँगों को सहलाया। फिर मेरी टाँगों के बीच में आ बैठा, मैंने आँखें खोल कर देखा, गोरे रंग का उसका लंड और सुर्ख गुलाबी रंग का उसका टोपा।
मेरे दिल से आवाज़ आई- “प्रीति यार… ये लंड तो चूसने वाला है, इसको ज़रूर चूसना!”

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