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पहले मैं मेरे बारे में बता देता हूं. मेरा नाम अजय है और मैं राजस्थान के अलवर का रहने वाला हूँ लेकिन अभी नोयडा में रह कर प्राईवेट जॉब कर र...

मामा की लड़की की चुदाई उसी के घर में


पहले मैं मेरे बारे में बता देता हूं. मेरा नाम अजय है और मैं राजस्थान के अलवर का रहने वाला हूँ लेकिन अभी नोयडा में रह कर प्राईवेट जॉब कर रहा हूं.
मैं एक अच्छे रंग रूप के साथ साथ गठीले शरीर का मालिक हूँ क्योंकि मैं जॉब जाने से पहले रोज जिम जाता हूँ. मेरी उम्र 23 साल है, मेरा कद 5 फुट सात इंच है, मेरे लंड का साइज 6.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है और मुझे चुदाई का बहुत शौक है. मैं हमेशा ही खूबसूरत चूत के चक्कर में रहता हूं.

यह कहानी मेरे और मेरे मामा की बड़ी लड़की दिव्या (बदला हुआ नाम) के बीच उस समय घटी, जब वो अपनी छुट्टियों में कोटा से दिल्ली अपने घर आई हुई थी. मैंने उसे बहुत दिनों से नहीं देखा था क्योंकि मेरी जॉब प्राईवेट होने की वजह से मैं घर पर कम ही जा पाता था.

अब मैं दिव्या के बारे में बता देता हूं. दिव्या की उम्र लगभग बीस साल है, वो एक बहुत ही खूबसूरत भरे हुए सेक्सी बदन की मालकिन है, उसका साइज 34-30-36 का है.

मेरे मामा दिल्ली में रह कर अपना बिजनेस देखते हैं और मामी एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं.

एक दिन जब मैं अपने घर पहुंचा तो मेरी मॉम का फोन आया उन्होंने मुझे बताया कि तुझे तेरे मामा के यहां जाना है, उन के यहाँ पर कोई काम है.
मैंने मॉम को कहा कि कल सुबह चला जाऊँगा.



अगली सुबह मैं नहा धोकर उनके घर के लिए निकल पड़ा. लगभग एक घंटे के बाद मैं दस बजे के करीब मेरे मामा के घर पहुंचा और घर की बेल बजाई. जब काफी देर तक कोई नहीं आया तो मैंने सोचा कि शायद घर में कोई भी नहीं है, ये सोच कर मैं वापस जाने ही वाला था कि दरवाजा खुला. दरवाजा किसी और ने नहीं बल्कि दिव्या ने खोला था. वो उस समय नहा कर आई थी और उसने पतला साथ गाउन अपने शरीर पर डाल रखा था.

क्या बताऊँ दोस्तो उस समय वो किसी हूर की परी से कम नहीं लग रही थी. इस वक्त उसकी उठी हुई छातियां तो कयामत ढ़हा रही थीं. मैं तो बस उसी में खो गया. एक तो मैंने उसे बहुत दिनों बाद में देखा था और अब तो वो पूरी कयामत लग रही थी.

मेरी नजरें उसकी छाती से हट ही नहीं रही थीं. मेरा ध्यान तब टूटा, जब उसने बोला- भाई अन्दर नहीं चलना क्या.. और ऐसे क्या देख रहे हो.. कभी लड़की नहीं देखी क्या?
मैंने अचकचा कर कहा- कुछ नहीं.. तुम इतनी बड़ी जो हो गई हो.
फिर हम अन्दर आ गए.

उसने मुझे बैठने के लिए बोला और बोली- मैं अभी अपने कपड़े चेंज करके आती हूँ.

वो जैसे ही पीछे मुड़ी, अपनी बहन की गांड देख कर मेरे मुँह से आह निकल गई. मेरी बहन ने सुन लिया और उसने पीछे मुड़ कर देखा और हँस कर अन्दर चली गई. ये सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं मेरे लंड को सहलाने में लग गया. थोड़ी देर बाद ही वो पिंक कलर का टॉप और जींस की छोटी सी नेकर पहन कर आ गई. तब तक मैं उसी के बारे में सोच कर अपने लंड को सहला रहा था.

अचानक मेरी बहन अपने कपड़े बदल कर आ गई… तब जल्दी से मैंने मेरे लंड से हाथ हटाया, पर शायद उसने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया.
उसने पूछा- और सुनाओ भाई… क्या हाल चाल हैं?

मैंने कहा- मैं तो मस्त हूँ लेकिन दिव्या यार, तुम भी तो खूब मस्त हो गयी हो.

उस समय वो क्या माल लग रही थी, दोस्तो दिल कर रहा था कि साली को यहीं पटक कर चोद दूँ, पर डर भी लग रहा था.

फिर वो मेरे लिए पानी लेकर आ गई और मेरे सामने सोफे पर बैठ कर बातें करने लगी. मैंने देखा कि बातें करते हुए बार बार उसकी नजर मेरे फूले हुए लौड़े पर जा रही थी.
मैंने उससे पूछा कि मामा मामी कहां गए?
उसने बताया कि पापा अपने काम पर और मम्मी स्कूल गई हैं, पर स्कूल में कोई प्रोग्राम होने की वजह से वो लेट ही आएंगी.

फिर मैं उससे उसकी पढ़ाई के बारे में जानकारी लेने लगा.

मैं आप लोगों को बताना भूल गया कि वह अपनी सारी बातें मुझसे शेयर करती है.

उसने कहा कि भाई नोयडा में कोई लड़की पटाई की नहीं..?
मैंने कहा- नहीं यार कहां टाइम मिलता है.
वो आँख दबा कर बोली- तो ऐसे ही काम चला रहे हो?
फिर मैं बोला- क्या बोला तूने?
वो ‘कुछ नहीं..’ बोलकर हंसने लगी. ये सब सुनकर मेरा हथियार फिर से खड़ा हो गया.
फिर मैंने उससे पूछा- पढ़ाई कैसे चल रही है और दिल्ली में रहकर कोई ब्वॉयफ्रेंड बनाया कि नहीं?

ये सुनकर वो मायूस हो गई और उसकी आँखों में आँसू आ गए. फिर वहां से उठकर मैं उसके पास आकर बैठ गया और पूछने लगा, तो वो मेरे कंधे पर सर रखकर रोने लगी.
मैंने उसे चुप करवाया और पूछा कि बात क्या है?
तो उसने बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड था, वो एक दिन उसे घुमाने के बहाने पार्क में लेकर गया और गलत काम करने के लिए बोला, तो मैं वहां से वापस आ गई.

ये सब बताकर वो फिर से रोने लगी. मैं उसे चुप कराने लगा और उसके सर और गालों पर हाथ घुमाने लगा.

क्या बताऊँ दोस्तो.. उसके कोमल शरीर पर हाथ घुमाने से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. अब मैं धीरे-धीरे उसके पूरे शरीर पर हाथ घमा रहा था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और शायद दिव्या को भी.

फिर धीरे-धीरे मैंने मेरे हाथ उसके चूचों की तरफ बढ़ा दिए और उन्हें सहलाने लगा. अब शायद दिव्या भी गरम हो रही थी क्योंकि उसकी साँस फूलने लग गई थी और उसका चेहरा लाल हो गया था.

वो चुपचाप मजे ले रही थी. मैंने उससे पूछा कि दिव्या मजा आ रहा है?
तो उसने मेरी तरफ देखा और अपनी आँखें बंद कर लीं. मैं मन ही मन खुश हो गया कि बेटा आज नया माल चोदने को मिल गया.

मैंने उस के नरम होंठों पर अपने होंठ रख दिए. काफी देर तक हम वहीं किस करते रहे और फिर मैं उसे बांहों में उठा कर उसके बेडरूम में ले आया और उस को बेड पर लिटा कर उसके ऊपर चढ़ कर उसके होंठों को चूमने लगा. अब वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

मैंने उस का पिंक कलर का टॉप निकाल दिया. मैंने देखा कि उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था. उसका टॉप निकलते ही उसके दोनों कबूतर आजाद हो गए. क्या मस्त नजारा था यार.. मैं उसके दोनों चूचों पर टूट पड़ा और वो ‘उउउउ.. मममहहा..’ जैसी आवाजें निकालने लगी.
अब मैं धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा उसके पेट, उसकी नाभि को किस करने लगा और फिर उस की नेकर के ऊपर से ही अपनी ममेरी बहन की चूत की खुशबू लेने लगा.

कुछ ही पलों बाद मैंने उस की नेकर को निकाल दिया और उस ने इस काम में अपने मोटे चूतड़ों को उठा कर मेरी मदद की.

क्या बताऊँ यार.. उस ने नीचे काले रंग की छोटी सी पेंटी पहन रखी थी. उस समय वो पूरी कयामत लग रही थी. मैं पेंटी के ऊपर से ही उस की चूत चाटने लगा और वो मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में ऐसे दबाने लगी, जैसे वो मुझ पूरे के पूरे को चूत के अन्दर डाल लेगी.
अगले ही पल वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- आहआह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… औह..
और फिर उसका शरीर अकड़ने लगा, वो एक बार झड़ गई.

मैंने उस की टांगों से उसकी पेंटी को अलग कर दिया तो जो गुलाबी नजारा सामने था.. वो देखने लायक था. दोस्तो चूत रस से भीगी हुई पाव रोटी की तरह फूली हुई गुलाबी रंग की चूत, जिस पर हल्के हल्के से सुनहरे बाल मखमल की तरह लग रहे थे.

फिर मैंने मेरे भी कपड़े निकाल दिए. वो मेरा मूसल लंड देखकर डर गई और बोली- इतना मोटा.. मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा.. बहुत दर्द होगा.
तब मैं बोला- दिव्या बस एक बार दर्द होगा, फिर मजा ही मजा आएगा.

मैंने उस से मेरे लंड को चूसने के लिए बोला, तो वो मना करने लगी. पर मेरे ज्यादा बोलने पर वो मान गई और चूसने लगी.
अब हम 69 की पोजिशन में थे, वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उस की चूत और गांड चाट रहा था.
ऐसा करते हुए वो एक बार और झड़ गई और बोली- भाई अब नहीं रहा जा रहा.. चोद दो मुझे.

मैंने अपने लंड पर और उस की चूत में बहुत सारा तेल लगाया और चूत के छेद पर लंड सैट करके हल्का सा धक्का मारा, तो मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया.
वो दर्द से चिल्लाने लगी- उई.. मर गई.. नहीं निकालो इसे.. प्लीज मैं मर जाऊंगी.
मैं थोड़ी देर वहीं रुका रहा और उस को किस करता रहा, उस के चूचों को दबाता रहा.

जब मैंने देखा कि उस का दर्द कुछ कम हुआ है, तो मैंने उस से कहा कि बस एक बार दर्द होगा, फिर बहुत मजा आएगा.
वो बोली- ठीक है.. पर आराम से…

मैंने उस के होंठों पर अपने होंठ रखे और एक जोर दार झटका दे मारा. मेरा लंड उस की सील तोड़ता हुआ पूरा अन्दर घुस गया और उस की चूत से खून बहने लगा. उस की आंखों में आंसू आ गए और वो छटपटाने लगी. मैं कुछ देर वहीं रूका रहा और फिर धीरे धीरे आगे पीछे होने लगा.

अब उस का भी दर्द कुछ कम हुआ था और वो भी अब गांड उठाने लगी. थोड़ी देर बाद वो बोलने लगी- आह… भाई जोर से चोदो.. उम्म… मुझे बड़ा मजा आ रहा है.
उस की कामुक आवाजें सुन कर मुझे भी और जोश आ गया. अब मैं ज्यादा स्पीड से उसे चोदने लगा. करीब 15 मिनट बाद उस का शरीर अकड़ने लगा और वो जोर से गांड उठाते हुए झड़ गई.. मेरे सीने से चिपक गई और उस ने अपने नाखूनों को मेरी पीठ में चुभा दिया.

अब उस के झड़ने से चूत और चिकनी हो गई और मुझे चोदने में ज्यादा मजा आने लगा. फिर कुछ देर बाद ही मैंने अपना सारा माल उस की चूत में डाल दिया. मेरे गर्म माल के उस की चूत में जाते ही वो एक बार और झड़ गई.

मैं काफी देर उस के ऊपर लेटा रहा. फिर हम दोनों उठे और अपने आपको साफ किया. उस चुदाई की वजह से वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. मैंने उसकी चूत पर दवाई लगाई और पेन किलर टेबलेट दी.

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