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मेरा नाम सुधा है, बात उस समय की है जब मैं उन्नीस बरस की हो रही थी. मेरा गांव बरौनी के निकट रजौड़ा ग्राम के पास में था. पुश्तैनी मकान...

मेरी मामी के साथ सहेलियों का लेस्बियन सेक्स




मेरा नाम सुधा है, बात उस समय की है जब मैं उन्नीस बरस की हो रही थी. मेरा गांव बरौनी के निकट रजौड़ा ग्राम के पास में था. पुश्तैनी मकान बड़े बड़े घर, दालान आदि था. रूम के नाम पर दो ही थे, पर इतने बड़े थे कि शहर के चार रूम आ जाएं… फिर भी जगह खाली रह जाए.

इन रूम के चारों तरफ गलियारे में छोटे छोटे दीवार के पार्टीशन देकर रूम बनाए गए थे. गेस्ट या यूं कहें कि जिन दंपतियों को एकांत चाहिए होता, उन्हें गलियारा वाला रूम प्रदान किया जाता, शेष के लिए हवेली नुमा रूम में सभी लोग या भाई बहन आदि सोया करते थे.

एक बार हमारे छोटे मामा मामी हमारे घर नया साल मनाने आ धमके थे. उन्हें वही गलियारा वाला रूम दिया गया.

वैसे वो लोग अंत तक कहते रहे कि अरे एक दो दिन के लिए आए हैं रात भर गप्पें मारेगें, नींद लगेगी तो वहीं सो लेंगे.. अलग से व्यवस्था करने की कोई जरूरत नहीं है.
पर मेरी माँ नहीं मानी, शायद वो मामा मामी के बारे में कुछ नहीं बहुत कुछ जानती थीं कि कुछ भी कर लो मामा को रात में कम से कम एक बार मामी की चूत चुदाई चाहिए ही चाहिए.

पिछली बार बड़े वाले रूम में सोये थे तो रात में मामी को पीछे से चोदने का प्रयास करने लगे थे. उन दोनों की हरकतों को सभी भाई बहनों ने रजाई के अन्दर के संग्राम को देखा था.. चट फच्च की आवाज को सुना था तथा सुबह जब ये दोनों उठे तो बाकी कसर हमारी नौकरानी ऊषा ने पूरी कर दी थी, उसने चिल्ला कर बोल दिया था- हाय री दैया ये चादर कड़ा कड़ा क्यों है.

शायद उन दोनों का अमृत रस ने चादर पर गिर कर रात भर में सूख कर चादर को कड़क कर दिया था.



मामी ने तो शरमा कर मुँह छुपा लिया था, उनके दोनों गाल सुर्ख गुलाबी हो गए थे. मामा जी आधी चाय पीते बाहर दालान में चले गए. सभी औरतें उस पूरे दिन मामी की क्लास लेती रही थीं.

मैं इतनी बड़ी तो हो ही गई थी कि मामा मामी की रास लीला को समझ सकूँ. दोपहर में सहेलियों के साथ उन दोनों के प्रणय को चटखारे लेकर सुनाई. उसमें से कुछ शादी शुदा थीं. वो लोग तो सविस्तार व्याख्या ही करने लगीं. एक ने तो यह भी कही कि अगर मामी दोनों टांगें फैला कर चल रही हों तो समझो मामा ने गांड मारी, या फिर मामी को कुतिया बना कर चोदा होगा.

हम सभी सहेलियां इसे चैक करने अन्दर आकर मामी से मिलने चल दिए. सभी ने देखा कि मामी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थीं.
मामी हम लोगों से दो-तीन साल ही बड़ी थीं इसलिए खुली हुई थीं. एक अपना अनुभव का लाभ लेते हुए पूछ बैठी कि मामी लगता है मामा ने आपकी गांड ही मार ली.

मामी बोली- मत पूछो यार, उनसे रहा नहीं जा रहा था. पहले तो खूब चूचियों को मसला, बाद में कान में फुसफुसा कर बोले कि इतने लोगों के बीच में चोदने भी एक एडवेंचर से कम नहीं होगा.
“उसके बाद क्या हुआ?” मेरी फ्रेंड रेणु ने अधीर होकर पूछा.
मामी ने कहा- जल्दी शादी कर ले तू.. पता चल जाएगा.
रेणु बोली- शादी जब होगी तब अपना किस्सा सुनाउँगी मामी.. पर अभी तो अपना सुनाओ.
मामी मुस्कुराईं और शरारत करते हुए रेणु को अपने पास बुलाया और मुझसे बोलीं- थोड़ा दरवाजा बंद कर दो.

आज्ञाकारी भगनी (बहन की बेटी- भानजी) का फर्ज निभाते मैंने दरवाजा बंद कर दिया.
मामी ने रेणु को खींच कर उसके अधर पर अपना होंठ रख दिए और धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया. रेणु छटपटाई पर मामी कहने लगीं कि कौन सा मैं लड़का हूँ जो तुम इतना भाव खा रही हो.
सभी सहेलियां जोर से हँस दीं.

मामी ने अपना गेम जारी रखा, अब रेणु को भी मजा आ रहा था. आगे बढ़ कर मामी ने उसकी समीज के नीचे से हाथ ले जाकर उसकी चूचियाँ दाबना शुरू कर दीं. फिर धीरे से उसकी समीज को उठाते हुए दोनों चूचियों को कैद से आजाद कर दिया.

उसकी छोटी सी चूचियों को देखकर बोलीं- लगता है इनकी मालिश किसी मर्द के हाथ से नहीं हुई है. अच्छा बता कि स्कूल में चूत में उंगली करना सीखा या नहीं?
रेणु बोली- नहीं मामी.. आज तुम्हीं मेरा मर्द बन कर मेरी जवानी का रसास्वादन कर लो और मेरा कौमार्य भंग कर दो.. प्लीज मामी.
मामी बोलीं- मैं अकेली नहीं करूँगी.. आज तुम्हारा सामूहिक भोज होगा.. तैयार हो न?
रेणु ने ‘हाँ’ कहा तो मामी हम लोगों की तरफ देखकर बोलीं- साथ मिलेगा सबका?

सभी सहेलियां भी इस सामूहिक रासलीला के लिए उत्सुक थीं.

मामी ने फिर से उसका होंठ चूसना शुरू कर दिया. रेणु की जीभ को अपनी जीभ से लड़ाने लगी थीं. रेणु की मादक कराहें रूम में फैल रही थीं. मामी ने मुझे इशारा किया तो मैंने झट से रेणु की एक चूची अपने मुँह में लेकर पीना शुरू कर दी; उसकी दूसरी चूची अर्पणा के मुँह में थी.

अर्पणा के गाल से मेरा गाल टकरा रहा था. मामी ने उसकी सलवार भी अब उतार दी. रेणु नीले रंग की पैंटी पहने हुए थी, जो हल्की सी भीग गई थी. मामी ने हल्के हाथों से पैंटी के ऊपर से थाप देना शुरू कर दिया.
रेणु की आँखें बंद हो गई थीं, होंठ खुले हुए थे. दोनों चूचियों को दो लड़कियाँ ऐसे पी रही थीं मानो कुतिया के दो पिल्ले दूध पी रहे हों.

मामी ने उस की पैंटी को भी अब हटा दिया. रेणु का साम्राज्य, उस का चूत प्रदेश उभर कर सबके सामने था. उसकी झांटों के बाल अभी तक काले काले नहीं हुए थे, सुनहरे रंग के बालों से आच्छादित चूत का नजारा अत्यंत मनोरम था.
चुत की फांकों के दोनों तरफ के छोटी पहाड़ी नर्म मुलायम थी. मामी ने एक उंगली से उसके भगशिश्न को सहलाना शुरू कर दिया.

अब मामी ने कोने में बैठे रितु की तरफ इशारा किया, जो अपना एक हाथ पैंटी में घुसा कर अपनी बुर में उंगली भीतर बाहर कर रही थी.

रितु को कमान मिलते ही वो कुतिया की तरह रेणु की बुर चाटने लगी. रेणु शायद इसके लिए तैयार नहीं थी, पर बेचारी एक लड़की पर चार कुतियां अपना अपना जौहर दिखा रही थीं.. जिससे उसकी एक न चली.

अब तो वह भी अपनी गांड उठा उठा कर जीभ की हरकतों का जवाब दे रही थी.

इतने में मामी बोलीं कि यह तो गलत बात है कि एक सहेली मालपुआ खाए और सब देखते रहें. सभी अपने अपने स्वर्गलोक जिसका दर्शन करने के लिए मर्द हमारी चाकरी करते हैं, को अपनी सलवारों से आजाद करो.

हम लोग तो गर्म हो ही चुकी थी तो सभी फटाक से नंगी हो गईं. मामी सबसे पहले नंगी हुईं, जो थोड़ा बहुत शरमा रही थीं, उनकी सलवार को भी जबरदस्ती उतार दिया गया. मामी रिंग लीडर की भूमिका में थीं. ज्यादातर बातें इशारों में हो रही थीं या केवल फुसफुसाहट में.

रिंग लीडर के इशारे पर सभी लड़कियों ने एक दूसरे के यौवन रस को चूसना शुरू कर दिया. अब हालात ये थे कि मामी मेरी बुर चाट रही थीं.. मामी की चूत रेणु चाट रही थी, रेणु की बुर रितु, तो रितु की चुत पर अर्पणा ने हमला कर दिया था.

घर से ऐसी आवाज आ रही थी मानो एक साथ कई बिल्लियाँ दूध पी रही हों. ‘सड़प सड़प..’ की आवाज से पूरा घर मादकता से भर गया था. कोई कुछ बोलना चाह भी रही थी तो केवल घुँ घुँ की आवाज आ रही थी. बोलना तो वैसे भी मना था.

मामी ने अब धीरे से अपना अंगूठा रेणु की गांड में घुसेड़ दिया. रेणु को डबल मस्ती आने लगी थी. बुर की चटाई तो चल ही रही थी कि बोनस में गांड में भी मामी का अंगूठा भीतर बाहर होने लगा था. जब गांड ने अंगूठा झेल लिया तो मामी ने अंगूठे के साथ एक उंगली और बढ़ा दी. अब रेणु थोड़ा दर्द से छटपटाई, पर थोड़ी देर डबल स्पीड से चूतड़ उठा उठा कर उंगली और बुर पर वार करवाती रही.

मामी धीरे से बोलीं- सभी एक दूसरे का यौवन रस पी जाना, जिसे पीने के लिए देवता को भी मनुष्य अवतार लेना पड़ता है.. यदि रस नीचे गिरा तो घर की सभी बड़ी लुगाइयों को पता चल जाएगा.

थोड़ी ही देर में रेणु के बुर से गाढ़ा चिपचिपा रस का बेग से निकला, जिसे रितु ने सड़प सड़प कर पी लिया.
मैंने भी धीरे से मामी के कान में कहा कि मामी मेरी बुर में कुछ झुरझुरी सी हो रही है.
मामी बोलीं- आने दे.. पूरी स्पीड से आने दे.. तू अपना अमृत मेरे मुँह में वर्षा दे.. मैं निहाल हो जाउँगी.. अभी अपनी कुंवारी भगनी का अमृत मिलेगा.. रात में आपके मामा का मधु मिलेगा. इस घर ने तो मुझे पूरी खुशियाँ दे दीं.

मेरी बुर से तेज रस निकला, जिसे मामी चूस चूस कर पी गईं. मामी ने मेरी बुर इतने जोर से पी कि चूत की नाक दूसरे तीसरे दिन तक सूजी रही.
बाद में मैं उनसे अपनी भगनासा के सूजने की बात बताई थी तो मामी बोली थी- कोई बात नहीं… पहली बार तेरे मामा ने भी मेरे बुर को चूस कर बरहल का फल बना दिया था.

मामी मेरी बुर में अपनी पूरी जीभ घुसा कर एक एक बूंद को चाट गईं, बोलीं- कुवांरी बुर की महक ही गजब की होती है.

फिर एक एक करके सभी सहेलियां झड़ कर अपने मुकाम पर पहुँच गई थीं और सभी पस्त हो गई थीं.
मामी ने सभी को किलकारते हुए कहा- वाह मेरी चुदक्कड़ भगनियों.. अपना काम हो गया, तो मामी को भूल गईं.

फिर क्या था सभी मामी पर एक साथ टूट पड़ीं. मैं मामी के होंठ काट रही थी. मामी ने अपनी जीभ निकाल कर बाहर कर दी, मैं उसे चूसने में मस्त हो रही थी. उनकी दोनों चूचियों के चूचुक पर दनादन वार हो रहा था. रेणु बदला लेने के मूड में लग रही थी. उसने मामी की चूत चूसते हुए अपने हाथ की तीन उंगली मामी की चूत में डाल दी थीं. वो मामी की चुत में उंगलियां भीतर बाहर करने लगी.
मामी बोलीं- आह.. रहम मत कर रेणु, अपनी चारों उंगली डाल दे.

मामी को पूरा मजा नहीं आ रहा था शायद रेणु का हाथ को देख नहीं पा रही थीं आखिर देखती कैसे होंठ मैं चूस रही थी और उनकी दोनों चूचियाँ को दो हब्शी लड़कियां खा रही थीं.
उन्होंने रेणु का हाथ महसूस किया, रेणु का हाथ पतला था, सो पांचों उंगली को सटाते हुए पूरा हाथ कलाई तक अपने चूत में घुसवा ली.
फिर मामी मस्ती में बोलीं- आह.. अब हुआ.. अब लगता है कि किसी मर्द का लंड चूत में रेलम पेल कर रहा है. अपने दूसरे हाथ की कम से कम तीन उंगली गांड में घुसा दे.

रेणु के लिए एक साथ तीन तीन काम सरल नहीं था. मैंने होंठ से हट कर मामी की चूत की नाक चाटना शुरू कर दी. रेणु पूरी तन्मयता से दोनों हाथों को उपयोग कर रही थी, एक हाथ कलाई तक चूत में जा रहा था और फच्च फच्च की आवाज कर रहा था तो दूसरे हाथ की तीन उंगली गांड की छेद की मालिश कर रही थीं.

थोड़ी ही देर में मामी का फौव्वारा छूटा जो मेरे मुँह में पूरा भर गया. मैं बिना देर किए गटक गई और मामी की चुत को चाट कर साफ कर दिया.

मामी ने फेसवाश और पेस्ट निकाल कर दिया. हम सबने चेहरा साफ किया तथा पेस्ट से मुँह को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लिया, जिससे कि हम लोगों के मुँह से चूत रस की गंध न निकले.
बाद में सभी को सेन्टरफ्रेश निकाल कर दी, जिसे हम लोगों ने खा ली. मामी के इशारे पर धीरे से कमरे का दरवाजा खोल दिया गया.

अब मामी ने हम लोगों को सीता मैया कि कहानी सुनाना शुरू कर दी कि कैसे जटायु ने रावण से लड़ाई की थी.
तब तक दादी भी आकर सुनने लगीं कि ये लोग आखिर बात क्या कर रही हैं.

जटायु प्रकरण सुनते ही बोलीं- बहुत संस्कारी बहू है.
रेणु भी बस इतना बोली- संस्कार तो पाँच मिनट पहले आतीं तो पता चलता.
सभी हँस दीं, मामी ने पूछा- क्या हाल है रेणु?
उसने कहा- क्या बताऊँ मामी… लगता है कि अभी भी गांड में कुछ घुसा हुआ है.

मामी बोलीं- कोई बात नहीं पहली बार है.. चार पाँच घंटे में सब ठीक हो जाएगा. तू मेरा हाल जानना चाहती थी न.. सब लोगों को प्रैक्टिकल कर दिखा दिया.

इसलिए इस बार मामा मामी को अलग कमरा दिया गया. मैंने धीरे से मामी को कहा कि मामी एक बार लाइव टेलीकास्ट चुदाई दिखाओ न.
मामी बोलीं- सब्र कर मेरी लाडो सब दिखाऊँगी.. पर प्रोमिस कर, तुम भी अपना लाइव टेलीकास्ट दिखाओगी.
मैंने हंस कर आँख मार दी.
मामी बोलीं- ठीक है, तो रात में तैयार रहना.

मामी की चुदाई का लाइव शो अगली बार!

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