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मेरा नाम दिव्या चौहान है, मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ.. उम्र 21 साल, रंग गोरा तीखी नज़रें, लंबे बाल. मेरे होंठ थोड़े मोटे हैं. देखने वालों ...

सेक्स कहानी प्यार में दगाबाजी की-1


मेरा नाम दिव्या चौहान है, मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ.. उम्र 21 साल, रंग गोरा तीखी नज़रें, लंबे बाल. मेरे होंठ थोड़े मोटे हैं. देखने वालों को ऐसा ही लगता था कि काश ये मखमली होंठ चूसने को मिल जाएं. मेरा फिगर 34-30-34 का था.. लेकिन अब ये 36-30-34 का हो गया है. अब ये बढ़ोत्तरी कैसे हुई.. आप खुद देख लेना.
मैं एक फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टर हूँ.

यह घटना करीब दो साल 6 महीने पहले हुई थी जब मैं कॉलेज में थी. मेरी क्लास में टोटल 30 स्टूडेंट्स थे, जिनमें रेग्युलर केवल 15 थे.. उनमें से 7 लड़कों के साथ मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी, उनके नाम थे राजीव, रवि, महेश, योगेश, दीपक, बिजेंदर उर्फ बीजू, सुदेश.
इन सबके साथ मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी. शुरू में तो सब फ्रेंड ही थे मगर धीरे धीरे उन में से एक महेश मुझे अच्छा लगने लगा.

बाकी सब लड़के मुझसे एक या दो साल बड़े ही थे, दिखने में सभी स्मार्ट एंड हैंडसम थे. बस महेश उनमें ज़्यादा मस्त था, जो मुझे अच्छा लगने लगा था.

मैं सफेद और रेड कॉंबिनेशन का सलवार सूट पहन कर कॉलेज गई तो सबकी नज़रें मुझे ही घूर रही थीं.
योगेश- वाउ यार आज ये दिव्या को क्या हो गया.. एकदम लाल परी लग रही है.
दीपक- यार ये फ्रेंड नहीं होती तो छेड़ देता.. साली की छाती देख… कैसे पहाड़ जैसी खड़ी हुई है.
योगेश- बस कर, महेश आ रहा है वो सुनेगा तो बुरा मान जाएगा. आजकल इन दोनों की बड़ी ट्यूनिंग हो रही है.

मैं- हैलो फ्रेंड्स कैसे हो.. अकेले अकेले क्या बातें कर रहे हो?
योगेश- कुछ नहीं ऐसे ही.. वैसे आज तुम बहुत अच्छी लग रही हो.
मैं- ओह्ह.. थैंक्स यार.
महेश- हाय दिव्या कैसी हो.. ज़रा एक मिनट मेरे साथ आओगी.. कुछ काम है.



दोस्तो, मैंने बताया था ना.. मैं महेश को पसंद करती थी और मन ही मन वो भी मुझे चाहने लगा था. मैं बस उसके पीछे किसी कठपुतली की तरह चल दी और वहां से कॉलेज के पीछे की तरफ गार्डन एरिया है, जहां काफ़ी पेड़ हैं, वो वहां जाकर रुक गया.

मैं- यहां क्यों लेकर आए हो महेश? क्या बात है अब मुझे बताओगे भी?
महेश- दिव्या, काफ़ी दिनों से मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता था, मगर सोचता हूँ तुम्हें बुरा ना लगे. मगर आज इन कपड़ों में तुम बहुत मस्त लग रही हो, तो सोचा आज अपने दिल की बात कर ही लेता हूँ.

मुझे पता था महेश क्या कहना चाहता है मगर मैं अनजान बन कर उसके मज़े लेने लगी और जब बहुत हो गया तो महेश ने मुझे ‘आई लव यू..’ बोल ही दिया. मैं भी कब तक चुप रहती, मैंने भी उसको हां बोल दिया और उसके चिपक गई.

महेश ने मेरे सर को पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर जोरदार चुम्बन किया. करीब 5 मिनट तक वो मेरे होंठों को चूसता रहा. मगर अचानक उसने मेरे मम्मों पे हाथ रखा और लेफ्ट चूचे को दबा दिया. मेरे जिस्म में जोरदार करंट सा लगा और मैंने उसको धक्का दे कर जल्दी से दूर हट गई.
महेश- क्या हुआ.. दिव्या ऐसे हट क्यों गई?
मैं- कुछ नहीं, अभी इतना सब ठीक नहीं.
इतना कह कर मैं वहां से भाग गई, मेरी साँसें अभी भी उखड़ी हुई थीं. मगर आज जो हुआ था वो बहुत अच्छा था.

ऐसे ही अब हमारे बीच प्यार की शुरूआत हो गई थी मगर उस किस के बाद दोबारा मौका नहीं मिला.

हमें ऐसे ही कई दिन बीत गए. मगर एक दिन क्लास में हम दोनों पास बैठे थे, हम दोनों रोज एक साथ सबसे पीछे वाले बेंच पर बैठते थे, टीचर पढ़ाने में बिज़ी थीं. बाकी सब भी टीचर की बातें ध्यान से सुन रहे थे.

महेश मेरी छाती की तरफ घूर रहा था. असल में मैंने कमीज़ ऐसी पहनी हुई थी, जिसमें से मेरी गहरी क्लीवेज नज़र आ रही थी.
मैं समझ गई कि महेश क्या देख रहा है फिर भी मैंने महेश से पूछा- क्या देख रहे हो महेश?
तो उसने ‘कुछ नहीं..’ कह कर बात टाल दी.

मगर मेरे मन में शरारत थी तो मैंने उसको बोल दिया- तुम फट्टू लड़के ऐसे ही होते हो.. बस देखते रहो, होता तुमसे कुछ भी नहीं है.
महेश- अच्छा ये बात है… अगर यहीं मैंने तुम को किस किया, तो मान जाओगी कि मैं डरपोक नहीं हूँ?
मैं- हा हा हा इतने दिन से तो हुआ नहीं.. आज क्या करोगे हा हा हा.

हम बहुत धीरे धीरे बात कर रहे थे और मेरी हँसी से वो चिढ़ गया. उस ने इधर उधर देखा और झट से मेरे सर को पकड़ कर एक जोरदार किस कर दिया. वैसे तो सब का ध्यान पढ़ाई में था.. मगर राजीव और रवि ने ये सब देख लिया. हम दोनों को इस बात का पता नहीं था, हम तो बस अपनी मस्ती में लगे हुए थे और किसी की तरफ नहीं देख रहे थे.

महेश- क्यों देख ली हिम्मत या तुम्हें और कुछ भी दिखाऊं?
मैं- इसमें क्या था… कुछ ऐसा कर के दोखाओ ना कि जिसमें लगे कि हां हिम्मत वाला काम है.
महेश- कर तो दूँगा मगर मेरी एक शर्त है कि तुम मुझे रोकोगी नहीं.
मैं- अच्छा ऐसा क्या करोगे? चलो मैं युम्हें कुछ नहीं कहूँगी, मैं नहीं रोकूंगी तुम्हें… तुम करो क्या करना है.

महेश- अगर तुम ने मुझे बीच में रोक दिया तो मेरी कोई भी बात माननी पड़ेगी.. सोच लो.
मैं- हां ठीक है.. अगर मैं जीत गई तो तुम्हें मेरी बात माननी पड़ेगी.

मुझे तो यही लगा था कि ज़्यादा से ज़्यादा महेश मेरे मम्मों को टच करेगा, या थोड़ा बहुत मसल देगा… मगर उसने जो किया वो सच में ख़तरनाक था. अगर कोई देख लेता तो बहुत गड़बड़ हो जाती.

महेश ने मेरे कमीज़ को ऊपर किया और मेरे मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही चूसना शुरू कर दिया. घबराहट और शर्म के मारे मेरी तो हालत खराब हो गई. लेकिन वो इतने में नहीं माना, उसने मेरी ब्रा को ऊपर कर दिया और मेरे निपल्स को चूसने लगा.
डर के मारे मेरी जान निकल रही थी, मुझे लगा अगर मेम ने मुड़ कर पीछे देख लिया तो मेरी अच्छी ख़ासी शामत आ जाएगी. मैंने जल्दी से महेश को हटा दिया और कपड़े ठीक करके बैठ गई.

अब महेश मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुरा रहा था उस की आँखों में अलग ही चमक थी.
मैं- पागल हो क्या.. ये सब करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?
सच कहूँ तो मुझे मज़ा बहुत आया मगर उस वक़्त झूठा गुस्सा दिखाना पड़ा.

महेश- कूल यार हम प्यार करते हैं. अब ये सब तो बस ऐसे ही कर दिया वैसे तुम शर्त हार गईं तो बहाने मत बनाओ ओके.
मैं- अच्छा अच्छा बोलो क्या करना होगा?
महेश- अभी नहीं… छुट्टी के बाद ओके.

छुट्टी के बाद महेश मुझे अकेले में एक तरफ ले गया और कहा कि मैं उसके साथ उसके रूम में आ जाऊं, वो वहां मुझे बताएगा कि मुझे क्या करना है.
पहले तो मुझे अजीब लगा मगर फिर मैंने हां कह दी. वो कहते हैं ना.. प्यार किया तो डरना क्या.. तो बस हम दोनों उसके रूम में चले गए.

मैं आपको बता दूँ महेश और उसके सभी दोस्तो ने एक फ्लैट रेंट पर लिया हुआ था, जिसमें 2 कमरे, हॉल और किचन थे बाथरूम अटॅच्ड थे. जब हम जा रहे थे तो महेश कुछ देर के लिए सुदेश से मिला, फिर हम उसके रूम में चले गए.

वीजू- क्या हुआ रे सुदेश.. ये महेश तुझे क्या बोल रहा था और इतनी जल्दी में दिव्या के साथ कहां गया है?
सुदेश- वो यार महेश बोला कि दिव्या को अपना घर दिखाने जा रहा हूँ, तुम सब मत आना. मैं तुम से आकर जल्दी ही कैफे पे मिलता हूँ.
वीजू- यार ये क्या बात हुई.. घर दिखाने तो हम भी साथ जा सकते हैं, वो अकेला क्यों गया है और तब तक हम क्या बाहर खड़े होकर झक मारें?
राजीव- अरे इसको क्या पूछता है, ये तो उसी की बोली बोलेगा. असल बात तो ये है कि इसके जिगरी ने लौंडिया फँसा ली है और आज उसका बुर चोदन होगा. तू देख लेना साला अकेला ही उसको चोदेगा और हम यहां अपना हाथ जगन्नाथ करते रह जाएंगे.
सुदेश- ये तू क्या बोल रहा है यार?
रवि- सही तो बोल रहा है. वो दिव्या की चुत का दाना फड़फड़ा रहा है.. आज भरी क्लास में किसिंग चल रही थी. साला महेश उसके चूचे चूस रहा था. अब चुदाई नहीं होगी तो क्या वहां दोनों अकेले भजन करने गए हैं?
योगेश- यार वैसे ये दिव्या है बड़ी जालिम चीज.. इसके होंठ देखे हैं.. लौड़ा चुसवाने में चुत जैसा मज़ा देगी साली.
दीपक- हां यार.. और साली की गांड भी मस्त है. घोड़ी बना कर चोदा जाए तो लंड के वारे-न्यारे हो जाएंगे.
रवि- हम यहां बातें करते ही रह जाएंगे और वहां चुदाई का खेल खत्म हो जाएगा. चलो अब.. नहीं तो महेश अकेला मज़े लूट लेगा और हम कोरे रह जाएंगे.
योगेश- ठीक है चलो.. मगर चुपचाप जाएंगे. कहीं हमारे जाने से काम बिगड़ ना जाए.. ओके.

वो सब वहां हमारे पास आने को निकल गए और मेरी तो यहां हालत पतली होने वाली थी.

मैं- महेश, बोलो ना क्या हुआ, मुझे ऐसे यहां क्यों लेकर आए हो?
महेश- यार हम प्यार करते हैं मगर मिल नहीं पाते. मैंने तुम्हें कितनी बार अकेले मिलने को कहा, मगर तुम नखरे करती हो. ऐसे कैसे हमारा प्यार आगे बढ़ेगा.
मैं- तुम जानते हो ना महेश, मैं घर से ज़्यादा बाहर नहीं निकल सकती. मेरी फैमिली.. बहुत बड़ी है यार, किसी को पता लग गया तो शामत आ जाएगी और आज तो इत्तफ़ाक़ से मैंने एक्सट्रा क्लास का बोला था, तब यहां आ गई हूँ.

मेरे आने का सुनकर महेश खुश हो गया था और ये सुनकर महेश के होंठों पर कातिल मुस्कान आ गई.

महेश- अच्छा यानि तुम खुद आज मुझ से अकेले मिलना चाहती थी?
मैं- ऐसा कुछ नहीं है.. मुझे बस तुम से कुछ बातें करने के लिए टाइम चाहिए था. अब तुम बोलोगे भी कि मुझे यहां क्यों लेकर आए हो?
महेश- दिव्या आई लव यू यार.. आई रियली मिस यू.. ऐसे अधूरे प्यार में मज़ा नहीं आता. आज मैं तुम्हें अपना बना लूँगा, प्लीज़ मना मत करना.. आज तुम बस मेरी हो जाओ.
मैं- अरे मैं तो तुम्हारी ही हूँ.. अब मैं और क्या करूँ?
महेश- ऐसे नहीं दिव्या.. आज हम मन से नहीं तन से एक होंगे, आ जाओ मेरी बांहों में.. मेरी सूनी जिंदगी को प्यार से भर दो.

मैं कुछ बोलती या समझ पाती, तब तक महेश ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से जकड़ दिया. हमारे बीच एक लंबे किस की शुरूआत हो गई. कभी महेश अपनी जीभ मेरे मुँह में देता, जिसे मैं चूसती, तो कभी मेरी जीभ को वो चूसता और साथ ही साथ उसके हाथ मेरी पीठ पे घूम रहे थे. वो मेरे मम्मों को भी बुरी तरह मसल रहा था.

अब मेरी वासना भी जाग गई थी. मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मेरे पूरे जिस्म में वासना की चींटियाँ रेंगने लगी थीं, मेरी साँसें तेज हो गई थीं.

एक लंबे किस के बाद महेश ने मुझे बिस्तर पे गिरा दिया और मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरे मम्मों को चूसने लगा. वो कभी मेरी गर्दन को चूसता, कभी मेरे कान की लौ को चूसता. मैं तो बस हवा में उड़ रही थी और अंजाने में मेरे मुँह से वो निकाला जो शायद महेश चाहता था.

मैं- आह.. सस्स… महेश ऐसे मत करो ना.. आह.. मेरे कपड़े खराब हो जाएंगे.. मैं घर कैसे जाऊंगी आह.. नहीं..
बस दोस्तो आज यहीं तक.. अब आगे की सेक्स कहानी अगले पार्ट में सुनाऊंगी, तब तक आप जल्दी से अच्छे अच्छे कमेंट्स मेरी आईडी पर करो.. मेरी आईडी है.

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