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मेरे कमरे से कुछ दूर एक लड़की रहती थी, उसे मैंने पटा लिया था. एक दिन बारिश हो रही थी, मेरी गर्ल फ्रेंड मेरे कमरे के सामने से निकली, वो भीग...

बारिश का वो दिन: गर्ल फ्रेंड की चुदाई

बारिश का वो दिन: गर्ल फ्रेंड की चुदाई

मेरे कमरे से कुछ दूर एक लड़की रहती थी, उसे मैंने पटा लिया था. एक दिन बारिश हो रही थी, मेरी गर्ल फ्रेंड मेरे कमरे के सामने से निकली, वो भीगी हुई थी. मैंने उसे अंदर बुला कर उस की चुदाई की. मेरी सेक्सी कहानी पढ़ कर मजा लें!

मेरा नाम राहुल है, मैं धनबाद झारखण्ड का रहने वाला हूँ।
पिछले कुछ सालों से मैं desi chudai kahani से बहुत मज़े करता आ रहा हूँ और मैंने कहानियाँ बहुत पढ़ी और लिखी भी… आपने मेरी कहानियों को काफी सराहा।

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उस समय मैं एक प्राइवेट ट्रेनिंग ले रहा था और हमारे उस स्कूल जिसमें मैं पढ़ता था, उसमें हम सभी लड़के लड़कियाँ एक ही साथ ट्रेनिंग करते थे. लड़कों के लिए वहीं पास में एक हॉस्टल था लेकिन मैं बाहर ही एक कमरा लेकर रहता और अपनी पढ़ाई किया करता था. मेरे दिन बहुत अच्छी तरह से निकल रहे थे, मैं बहुत खुश था।

मेरे कमरे से कुछ दूर एक लड़की सुषमा रहती थी, वो मेरे कमरे के सामने से निकलती थी, उसे मैंने पटा लिया था.
सुषमा मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त थी, वो दिखने में बहुत सुंदर, गोरी होने के साथ साथ उसका वो गरम जिस्म मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित किया करता था और हमारे बीच बहुत प्यार था, जिसकी वजह से हम बिल्कुल पागल हो चुके थे। हमें एक दूसरे से बिना मिले, देखे, बात किए बिल्कुल भी चैन नहीं मिलता और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत हंसी, मजाक किया करते थे जिसकी वजह से हमारे बीच की दूरियाँ एकदम खत्म हो चुकी थी, हम दोनों ने सेक्स को छोड़ कर बाकी बहुत सारे काम पहले से ही करके मज़े ले लिए थे और अब हम दोनों बहुत समय से किसी अच्छे मौके के इंतज़ार में थे, जिसका फायदा उठा कर हम दोनों अपने मन की इस इच्छा को भी एक बार पूरा कर लें।



एक शाम को अचानक बहुत तेज बारिश होने लगी थी, जिसकी वजह से मेरे पड़ोसी सभी आसपास के लोग अपने अपने घरों में बंद थे और मेरी गर्लफ्रेंड कहीं गई हुई है, क्योंकि वो मेरे ही सामने से निकली थी इसलिए में अपने कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला रखकर में उसी की राह देख रहा था। दोस्तो, आज मेरा उसकी चुदाई करने का पूरा पूरा विचार था। मैं इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था, मैं बैठा उसका आने का इंतजार करते हुए उसकी चढ़ती हुई जवानी के बारे में सोच सोच कर पागल हुआ जा रहा था। मेरे बदन में अजीब सा कुछ होने लगा था और मेरा लंड भी अब तन कर खड़ा होने लगा था।
तभी अचानक वो मुझे मेरे सामने से आती हुई नजर आई, मैंने अपने दरवाजे को थोड़ा सा ज्यादा खोल दिया और जब वो मेरे एकदम पास आ गई, मैंने उससे कहा- तुम अंदर ही आ जाओ, इस इतनी तेज बारिश में कहाँ जाओगी? जब पानी रुक जाए तब तुम चली जाना, हम बैठ कर कुछ देर बातें करते है, आओ ना अंदर!
मैंने देखा कि वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.

उसको भी मेरे साथ रहना, बातें करना अच्छा लगता था, वो बिना कुछ कहे कमरे के अंदर आ गई। उसके अंदर आते ही में बहुत खुश हो चुका था, क्योंकि आज मेरे मन की मुराद पूरी होने वाली थी और अब उसकी चुदाई का काम खत्म करके अपने मन की इस बहुत पुरानी इच्छा को पूरा करना चाहता था।

सुषमा अंदर आकर अपने बदन से पानी को साफ करने लगी, उसका वो पूरा गीला बदन जिसके ऊपर उसके कपड़े एकदम चिपके हुए थे, जिसकी वजह से मेरे सामने उसका एक एक अंग साफ साफ झलक रहा था. उसको इस हालत में देख कर मुझे ऐसा लगने लगा था जैसे वो मेरे सामने नंगी खड़ी हो क्योंकि गीले कपड़ो से मुझे उसका गोरा पेट, दोनों गोलमटोल बूब्स के ऊपर बंधी ब्रा, बड़े आकार के गले वाले सूट से उसके वो गोरे गोरे बूब्स उभरे हुए मुझे बहुत ही ललचा रहे थे और उसकी वो सलवार भी जांघों के अंदर तक जकड़ फंसी हुई थी।

वाह उसने क्या कयामत की जवानी पाई थी… उसके वो बड़े आकार के एकदम टाइट बूब्स, पतली कमर और वाह उसकी वो बड़ी गोल गांड… हाय देखकर ही मुझे मज़ा आ गया और मैं उसको घूर घूरकर देखने लगा। मेरे सब्र का बाँध टूट सा गया, मैंने हिम्मत करके बिना देर किए उसको पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने खड़े लंड से मैं उसकी गांड पर ज़ोर लगाने लगा, पहले मैं उसकी कमर और अब उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने, सहलाने लगा था और मेरा वो लंड एकदम तन कर उसके दोनों कूल्हों के बीच में सेट होकर ठीक जगह पर अंदर घुस गया और जोश में फनफनाने लगा।
मेरा मन करने लगा कि मैं उसी समय अपना लंड उसकी गांड के अंदर डाल दूँ… जोश की वजह से मेरे दिमाग़ में बिजली सी दौड़ने लगी थी और मेरा पूरा बदन काँप रहा था।

सुषमा भी जैसे पहले से ही मेरे साथ यह सब करने के लिए तैयार थी इसलिए अब तो हम दोनों का वो खेल शुरू हो गया, जिसके लिए हम दोनों इतने लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे। मैं धीरे धीरे उसके गीले कपड़े एक एक करके उतारने लगा, कुछ ही सेकिंड बाद उसका वो गोरा, कामुक बदन मेरी आंखों के सामने बिना कपड़ों के एकदम नंगा मुझे अपनी तरफ आकर्षित करके ललचाने लगा था क्योंकि मैंने पहली बार उसको अपने सामने पूरी नंगी देखा था, वो मेरे जीवन का सबसे अलग दिन था, जिसके बारे में सोचकर आज भी रोमांच से भर जाता हूँ और मेरे पूरे शरीर का रोम रोम खड़ा हो जाता है।

फिर उसके गीले, चिकने बदन तो चूमते हुए मैं उसकी चूत की तरफ आगे बढ़ने लगा था और जैसे ही मैंने उसकी एकदम चिकनी उठी हुई चूत पर अपने होंठ रख कर चूमना शुरू किया तो सुषमा उस मस्ती, जोश की वजह से तड़प उठी और उसी समय सुषमा ने मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे किया और वो अब अपनी चूत को मेरी नाक पर रगड़ने लगी थी। उस समय उसने सारी हदें तोड़ दी और मैं उसका वो जोश देख कर चकित था।

मैंने भी उसके दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसकी गांड को सहलाते हुए उसकी रस भरी चूत को चूमने, चूसने लगा, सुषमा की कामुक, गीली चूत की प्यारी खुशबू मेरे दिमाग़ में छाने लगी, मैं पागलों की तरह उसकी चूत और उसके आस पास के हिस्से को चूमने लगा, साथ ही बीच बीच में उसकी चिकनी गदराई हुई जांघों को भी चाट लेता।

फिर वो मस्ती से भर कर सिसकारियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी- आह्ह्ह राजा ऊह्ह्ह्ह… प्लीज तुम इसके अंदर अपनी जीभ डाल कर चाटो।
अब तक उसकी नशीली चूत की उस मादक खुशबू ने मुझे बुरी तरह से पागल बना दिया था, मैंने उसकी चूत से अपने मुँह को उठाए बिना ही उसको खींच कर पलंग पर बैठा दिया और मैं खुद नीचे जमीन पर बैठ गया।
फिर मैंने उसकी दोनों जाँघों को पूरा फैला कर अपने दोनों कंधों पर रख लिया और फिर आगे बढ़ कर उसकी चूत के होंठों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

सुषमा मस्ती में आकर पागलों की तरह ना जाने क्या क्या बड़बड़ाने लगी थी और उसने अपने कूल्हों को आगे पीछे करके अपनी चूत को मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया था। अब उसके कूल्हे पलंग से बाहर आकर हवा में झूला झूल रहे थे और उसकी मखमली, मुलायम जांघों को पूरा दबाव मेरे दोनों कंधों पर था. मैंने अपनी जीभ पूरी उसकी चूत में डाल दी और मैं चूत के दाने को टटोलने के साथ साथ चूत के अंदर के हिस्से को भी सहलाने लगा।

सुषमा अब बहुत मस्ती में आकर तिलमिला उठी, वो अपने कूल्हों को ऊपर उठा उठा कर अपनी चूत को मेरे मुख पर दबाने लगी और सिसकारियाँ लेते हुए कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरे राजा तुम यह क्या कर रहे हो? मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, तुम अब अपनी जीभ को अंदर बाहर करो ना! आह्ह्ह्ह हाँ… ऐसे ही चोदो मेरे राजा… ऊफ्फ्फ चोदो ऊईई, तुम अपनी जीभ से चोदो मुझे मेरी जान… आज मैं अब अपनी सारी कसर निकालूंगी, पिछले एक साल से यह सब करने के लिए बहुत तरस रही थी… हाँ मेरे राजा, चोदो तुम आज मेरी चूत को अपनी जीभ से!

मुझे भी उसकी बातें सुन कर बड़ा जोश आ गया और मैं उसकी चूत में जल्दी जल्दी अपनी जीभ को अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा और सुषमा भी पूरी तरह से जोश में आकर अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से उठाकर मेरी जीभ से अपनी चूत को चोदने लगी थी। मुझे इस जोश से भरी चुदाई का बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने अपनी जीभ को सीधी करके खड़ी कर ली और मैं अपने सर को आगे पीछे करके उसकी प्यासी चूत को चोदने लगा था।

मेरे यह सब करने की वजह से उसका जोश दुगना हो चुका था, वो पागलों की तरह अपने कूल्हों को ज़ोर ज़ोर से ऊपर उठाती हुई मुझसे कहने लगी- आह्ह्ह हाँ… और ज़ोर से… और ज़ोर से पूरा अंदर तक डालो मेरी जान! आहह्ह्ह उऊईईइ माँ मैं मर गई।

सुषमा की उस हालत को देख कर मैं तुरंत समझ गया कि अब वो झड़ने वाली थी, इसलिए वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाते हुए अपनी चूत को मेरे पूरे चेहरे पर रगड़ने लगी थी और मैं भी पूरी तेज़ी से अपनी जीभ को लप लपाकर उसकी चूत को पूरी तरह से चाट रहा था।

सुषमा उसी समय पलंग पर पेट के बल लेट गयी और उसने अपने घुटनों के बल होकर अपने दोनों कूल्हों को हवा में ऊपर उठा लिया।
वो दृश्य बहुत ही देखने लायक था क्योंकि अब सुषमा के वो गोरे, चिकने, गोल मटोल कूल्हे मेरी आँखों के सामने आकर लहरा रहे थे। मुझसे बिल्कुल रहा नहीं गया, मैंने आगे बढ़ कर उसके कूल्हों को अपने मुँह में भर कर कस कर काट लिया, दर्द की वजह से उसके मुख से ‘ऊउईईईई आईईई माँ मर गई…’ चीख निकल गयी।

फिर मैंने बहुत सारा वेसलिन लेकर उसकी चूत की दरार में लगाकर एकदम चिकना कर दिया, तभी वो बीच में बोल पड़ी और कहने लगी- ऊपर से लगाने से कुछ नहीं होगा, तुम उंगली में लेकर इसको अंदर भी लगाओ और अपनी उसी उंगली को चूत के अंदर डाल डाल कर पहले इस छेद को ढीला करो और उसके बाद आगे कुछ करने की बात सोचो।

मुझे उसकी वो बात एकदम सही लगी क्योंकि यह चुदाई हम दोनों का पहला अनुभव था और मैं उसकी छोटी सी कुंवारी चूत में अपने मोटे लंड को डालने जा रहा था, जिसका दर्द उसको सह पाना ना मुमकिन था।
मैंने उसके कहने पर अपनी बीच वाली उंगली पर बहुत सारा वेसलिन लगा कर उसकी चूत के अंदर डालने की में कोशिश करने लगा और पहली बार मेरी उंगली अंदर नहीं गई तो मैंने अपने दूसरे हाथ से छेद को फैला कर दोबारा वैसी ही कोशिश दोबारा की, तब मेरी उंगली थोड़ी सी अंदर चली गयी और मैंने थोड़ा सा बाहर निकालकर एक बार फिर से झटका देकर अंदर डाला तो घप से मेरी पूरी चिकनी, उंगली चूत के अन्दर घुस गई।

उसने दर्द की वजह से एकदम अपने कूल्हों को सिकोड़ लिया, जिसकी वजह से उंगली एक बार फिर से बाहर निकल गयी। अब सुषमा सिसकारियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी- आह्ह्ह उफ्फ्फ अईई… हाँ बस तुम इसी तरह से कुछ देर तक अपनी उंगली को अंदर बाहर करते रहो, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।
मैं उसके कहने के हिसाब से अपनी उंगली को ज्यादा तेज धक्कों के साथ अंदर बाहर करने लगा, मुझे भी इस काम में बड़ा मज़ा आ रहा था और वो भी अपनी कमर को हिला हिला कर मेरे साथ मज़ा ले रही थी.
कुछ देर ऐसे ही मज़े लेने के बाद उसने मुझसे कहा- चलो मेरे राजा, अब तुम आ जाओ और अपना वो इसके अंदर डाल दो।

मैं तुरंत उठ कर अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर मैंने उसकी चूत के छेद पर रख दिया और उसने थोड़ा सा पीछे होकर लंड को ठीक निशाने पर रख लिया। फिर मैंने उसके कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर एक जोरदार धक्का लगा दिया, तब मुझे महसूस हुआ कि उसकी कुंवारी चूत का वो छेद बहुत ही टाइट और आकार में छोटा भी था। फिर मैं उससे बोला- सुषमा, यह अंदर नहीं जा रहा, तुम ही बताओ में क्या करूं?

उसने तब अपने दोनों हाथों से अपने कूल्हों को खींच कर चूत के छेद को चौड़ा किया और मुझसे दोबारा ज़ोर का धक्का लगाने के लिए कहा।
इस बार मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया, जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा सुषमा की चूत के लाल, लाल छेद में चला गया, सुषमा की कसी हुई चूत ने मेरे टोपे को जकड़ लिया और मुझे उस समय बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था जिसको में किसी भी शब्दों में लिख कर नहीं बता सकता।
लेकिन सुषमा की एक जोरदार चीख निकली, उसे बहुत दर्द हुआ था, मैं डर गया और रूक गया.

फिर मैंने कुछ देर उसका दर्द कम हो जाने के बाद दोबारा धक्का लगाया, जिसकी वजह से उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया, लेकिन वो दर्द की वजह से ज़ोर से चीख उठी- ऊईईई माँ… मैं मर गई… मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, तुम थोड़ा आराम से डालो वरना मेरी जान निकल जाएगी!

लेकिन अब मैंने उसकी चीख पर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर मैंने अपने लंड को थोड़ा सा पीछे खींच कर एक जोरदार धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से अब मेरा सात इंच का लंड उसकी चूत को चीरता, फाड़ता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया और वो फिर से चीख उठी- ऊउईईईईई माँ… क्या तुम आज मेरा दम ही निकाल कर मेरा पीछा छोड़ोगे, प्लीज धीरे करो।

अब वो चिल्लाते हुए बार बार अपनी कमर को हिला हिला कर मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी। मैंने आगे की तरफ झुक कर उसके बूब्स को पकड़ लिया और उन्हें सहलाने, मसलने लगा. मेरा लंड अभी भी पूरा का पूरा उसकी चूत के अंदर ही था।

मैं कुछ देर बाद सुषमा की चूत में अपने लंड को डाले हुए ही उसके बूब्स को सहलाता रहा और जब वो कुछ शांत हुई तो वो अपने कूल्हों को हिला कर मुझसे कहने लगी- चलो, अब ठीक है, तुम शुरू करो।
उसका इशारा पाकर मैंने दोबारा सीधे होकर उसके कूल्हों को पकड़ कर धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाकर मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया, उसकी चूत बहुत ही टाइट थी, इसलिए मुझे धक्के देकर चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था क्योंकि मेरा लंड चूत की दीवारों से घिसता हुआ अंदर बाहर हो रहा था। अब वो भी अपना दर्द भुला कर सिसकारियाँ भरते हुए वो मज़ा लेने लगी थी।

उस पूरे कमरे में चुदाई की ठप ठप फच फच आवाज़ गूँज रही थी और जब उसके थिरकते हुए कूल्हों से मेरी जांघें टकराती थी तो मुझे ऐसा लगता कि जैसे कोई तबलची तबले पर थाप दे रहा हो। दोस्तो, हम दोनों ही उस काम को करके पसीने पसीने हो गए थे लेकिन हम दोनों में से कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था और वो मुझे बार बार ललकार रही थी, वो मुझसे कहने लगी- आह्ह्ह्ह हाँ चोद लो, चोद लो अपनी सुषमा की चूत, आज तुम फाड़ दो इसको और ज़ोर से मेरे राजा वाह मज़ा आ गया हाँ और ज़ोर से वाह तुमने तो आज मेरी इस चूत को फाड़ ही डाला।

मैं भी जोश में आकर उछल उछल कर धक्के लगा रहा था और अपना पूरा का पूरा लंड बाहर निकाल कर झटके से वापस अंदर डालता तो उसके मुख से चीख निकल जाती।
मेरा अब झड़ने का समय आ चुका था, किसी भी समय मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था और उधर वो भी अपनी मंज़िल के पास आ चुकी थी। मैं उसके बदन को पूरी तरह अपनी बाहों में समेट कर धनाधन धक्के लगाने लगा और वो भी सम्भल कर ज़ोर ज़ोर से आह्ह्ह ऊऊहह करते हुए अपने कूल्हों को आगे, पीछे करके अपनी चूत में मेरा लंड लेने लगी थी।

अब हम दोनों की सांसें फूल रही थी और हमारी धड़कनें तेज गति से चलने लगी थी और आखिर में मेरा ज्वालामुखी फूट पड़ा और मैं झड़ते हुए उसकी कमर से चिपक कर सुषमा की चूत में ही झड़ गया और अब सुषमा का पानी भी निकलने को था और वो भी चीखते हुई झड़ गयी।

उसके बाद भी हम दोनों उसी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए पलंग पर लेट गये और आराम करने लगे।

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