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अभी तक मेरी हिंदी एडल्ट स्टोरी में आपने पढ़ा कि विक्रांत मोबाइल पर अपनी और अकीरा की पिछली रात की चुदाई की पोर्न वीडियो देख रहा था और मुठ म...

हर किसी को चाहिए तन का मिलन-7


अभी तक मेरी हिंदी एडल्ट स्टोरी में आपने पढ़ा कि विक्रांत मोबाइल पर अपनी और अकीरा की पिछली रात की चुदाई की पोर्न वीडियो देख रहा था और मुठ मार रहा था कि उसकी नव नियुक्त सेक्रेटरी ने उसे मुठ मारते देख लिया.
अब आगे:

मौके का फायदा उठा के ईशा ऑफिस में आ गयी, ऑफिस में फैली वीर्य की खूशबू ईशा के नथुनों में घुस गयी. ईशा को लन्ड लिए काफी समय हो चुका जिसके कारण वो कुछ बेचैनी भरी मदहोश हो रही थी। उसके दिमाग में अभी भी अपने बॉस का मूसल लन्ड घूम रहा था।
विक्रांत बाथरूम से बाहर आते हुए- अरे ईशा, तुम कब आयी?
ईशा- बस अभी आयी सर, कोई काम है मेरे लिए?
उसने जानबूझ कर थोड़ा झुकते हुए पूछा।

विक्रांत की नज़र उसके उभरे हुए स्तनों की लकीर पर पड़ी. “ये औरतें और इनके ये मम्में मुझे काम नहीं करने देंगे… रंडी कैसे अपने मम्में दिखा रही है. और फिर कोई चोद दे तो दुनिया हाय तौबा करने लगती हैं.” उसने मन में सोचा।
“नहीं, अभी कोई काम नहीं है तुम आराम कर सकती हो.” उसने ईशा से कहा और अपनी कुर्सी पर बैठ गया।



ईशा ने अपनी पीठ कुर्सी पर लगा दी और आँखें बंद कर ली जल्दी ही उसे नींद आ गयी। विक्रांत उसके ऊपर नीचे होते सुडौल वक्ष को देख रहा था. एक पल के वक्ष ऊपर को उभर आते और ईशा के सांस छोड़ने पर नीचे हो जाते। घुंघराले काले लम्बे बालों की लटें उसके गोरे चेहरे को छेड़ रही थीं उसके तराशे हुए होंठ बेहद आकर्षक लग रहे थे, उनमें और अकीरा के होंठों में कुछ एक जैसा था जो विक्रांत को अपनी ओर खींच रहा था।

विक्रांत को अचानक न जाने क्या हुआ उसने अपने मोबाइल से ईशा की कई तस्वीरें खींच ली और उन्हें अकीरा को वाट्सएप कर दिया।

दूसरी और अकीरा और शालिनी अपने मिशन पर निकल पड़ी थी.

दोपहर के 2.30 बज रहे थे, अकीरा और शालिनी मतलब की सिमरन और दीपिका रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में बैठी ट्रेन का इंतजार कर रही थी जब सिमरन को वाट्सएप पे मैसेज आया।
दीपिका- सिमरन, तू मोबाइल यूज़ कर रही है? बॉयफ्रेंड हाँ? बड़ी चालाक है।
सिमरन- हाँ, बॉयफ्रेंड का ही मैसेज होगा, प्राइवेट नंबर है जो केवल उसी के पास है।
दीपिका- कमीटेड या बस मज़े?
सिमरन- कमीटेड।
दीपिका- दिखा न कैसा है लौंडा?
सिमरन ने उसे विक्रांत की फ़ोटो दिखा दी।

दीपिका- मस्त है देखने में तो, काम में कैसा है?
सिमरन- काम में भी मस्त है बल्कि मस्त से भी मस्त है।
दीपिका- कोई वैसी फ़ोटो दिखा न। उसका मतलब न्यूड फ़ोटो से था।
सिमरन- यार तू भी न… उसने रात को खींची एक फ़ोटो दीपिका को दिखा दी।
दीपिका- ओह माई गॉड।
सिमरन- क्या हुआ?
दीपिका- यार साले का लन्ड है या अजगर। रात को तू इसी के साथ थी न?
सिमरन- हाँ, इसी के साथ थी पर तुझे कैसे पता चला?
दीपिका सिमरन के गाल खींचते हुए- मेरी जान तेरी चाल बता रही है।

उन दोनों की बातें चल ही रही थीं कि एक लम्बा चौड़ा 30-35 साल का अंग्रेज वेटिंग रूम में आया। सिमरन और दीपिका की आँखें मिली और दोनों समझ गयीं कि उनका शिकार आ चुका है।
सिमरन- है तो हैंडसम, फ़ोटो में इतना हैंडसम नहीं लग रहा था।
दीपिका- इसका शिकार मैं करूँगी।
सिमरन- कैसे?
दीपिका- मेरे पास प्लान है, आती हूँ मैं।

दीपिका उठ के चली गयी और अंग्रेज के बगल में बैठ गयी।
अकीरा समझ गयी कि शालिनी क्या चाल चल रही है। शालिनी के चले जाने के बाद उसने विक्रांत का मैसेज ओपन किया और लड़की की तस्वीरों को देख कर उसे जलन भी महसूस हुई पर वो जानती थी कि विक्रांत ने उसे जलाने के लिए ही ऐसा किया है।

शालिनी पास नहीं थी तो उसने विक्रांत को मैसेज किया- कौन है यह?
विक्रांत- मेरी पर्सनल सक्रेटरी!
अकीरा- सेक्रेटरी ही है या इसे भी…
विक्रांत- अभी तो कल ही जॉइन किया है। सेक्सी है ना?
अकीरा- हम्म मुझे तो रात को तंग कर चुके अब इस घटिया चाल से तुम्हारी गलती को नहीं भूलने वाली।
विक्रांत- सॉरी अकू वो…नशे में… प्लीज माफ कर दो।
अकीरा- हाँ यह ठीक है, पहले जान ले लो और बाद में सॉरी बोल दो।

उसके मन में एक खुराफात चल रही थी जिसे वो विक्रांत के हाथों मनवाना चाहती थी इसलिए इतना नाटक कर रही थी।
विक्रांत- तो देवी जी, हुक्म करो कि क्या करूँ मैं जो आप मान जाओ?
अकीरा- तुम्हें देवी के तीन काम करने होंगे। बोलो मंजूर है?
विक्रांत- मंजूर है।
अकीरा- कसम खाओ मेरी!
विक्रांत- तुम्हारी कसम!

अकीरा- पहला काम कल शाम 6 बजे से पहले तुम अपनी सेक्रेटरी को अपने अजगर के दर्शन करवाओगे और इस सब को रिकॉर्ड करके मुझे भेजोगे यह काम पूरा होने पर अगला काम बताया जाएगा।
विक्रांत- पागल हो क्या? क्या बचपना है ये?
अकीरा- समझ गयी मेरी कसम भी झूठी थी। एक छोटी सी शरारत के लिए ही तो कहा है। रूपाली दीदी के लिए तो सब करते थे।
विक्रांत बेचारा जाल में फंस चुका था- ठीक है, कोशिश करता हूँ।

इससे पहले कि अकीरा रिप्लाई करती शालिनी वापिस आ गयी, उसने जल्दी से बाई का मैसेज किया और मोबाइल पर्स में डाल लिया।
सिमरन- तो बात बनी?
दीपिका- बन तो गई है 5000 अभी मिले और 5000 काम के बाद।
सिमरन- तूने उससे कहा क्या?
दीपिका- यही कि स्टूडेंट हूँ पर्स चोरी हो गया मेरा।
सिमरन- उसने क्या कहा?
दीपिका- कहने लगा बड़ा अकेला है कोई साथ मे सफर करने वाला मिल जाता तो अच्छा है।
सिमरन- बड़ी कमीनी है, तू इस काम के लिए कॉल गर्ल बन गयी।
दीपिका- देश के लिय कुछ भी!

सिमरन- हम्म वो भी है। तो इसे वो ड्रग खिलानी होगी वो भी अभी वरना इसे तेरी शक्ल याद रह जायेगी।
दीपिका- वो उसके पानी की बोतल में डाल दी मौका देख के, बस अब रात का इंतजार है।
सिमरन- इतनी आसानी से कर दिया तूने सब… एक पल के भी घबराई नहीं।
दीपिका- मेरी जान इमोशनल होने का वक़्त नहीं है यह। चल यह बता अपने यार से क्या चैट कर रही थी?

सिमरन एक पल के लिए हिचकिचाई पर दूसरे ही पल उसने मोबाइल दीपिका के हाथ में दे दिया- ले खुद ही पढ़ ले!
दीपिका अकीरा और विक्रांत की चैट पढ़ने के बाद- बड़ी शरारती है अजगर मल को मुश्किल में डाल दिया तूने! पर तू सच में चाहती है कि वो ऐसा करे?
सिमरन- हाँ, पता नहीं क्यों मुझे लगता है जो खुशी नहीं मिली आज तक वो अब मिले।
दीपिका- बड़ी प्यारी है तू… कभी मैं भी ऐसी ही थी।
सिमरन- यार तू तो मुझे चने के झाड़ पे ही चढ़ा देगी। अब चल ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 2 पे आ चुकी है।

उधर विक्रांत के घर में:
पलविका शाम पांच बजे कॉलेज से घर आई, हमेशा की तरह आज भी उसने एक आम जीन्स के ऊपर ओवर साइज्ड टॉप पहनी हुई थी बाल उलझे हुए पर उसे देखने वालों को यही लगता कि यह भी कोई नया फ़ैशन होगा।
उसने अपनी मिनी कूपर गैराज में पार्क की जिसकी पिछली सीट किताबों से खचाखच भरी हुई थी। उसे अपने काम के लिए किसी की हेल्प लेना पसंद नहीं था तो उसने किताबें उठाई जो इतनी ज्यादा थीं कि उसके चेहरे तक आ रहीं थी और उसे देखने में मुश्किल हो रही थी.

वो कार को लॉक करने की कोशिश ही कर रही थी कि एक लड़की की मधुर आवाज उसे सुनाई दी- दीदी कुछ किताबें मैं उठा लेती हूँ!
पलविका ने नज़रें घुमाई तो रश्मि उसके सामने थी।
पलविका- नहीं नहीं, तुम रहने दो, मैं कर लूँगी, मुझे आदत है।
रश्मि- नाना सही कहते थे कि आपको किसी की मदद लेना पसंद नहीं।
पलविका कुछ किताबें रश्मि को देते हुए- नहीं, यह बात नहीं है बस मुझे किसी को तंग करना पसंद नहीं है।
रश्मि- दीदी, मुझे तो आपका काम करना अच्छा लगता है।

पलविका- थैंक्स, आज तो थक गई मैं!
रश्मि- आप बहुत पढ़ती हैं ना?
पलविका- यह किसने कह दिया तुमसे।
रश्मि- नाना ने… और कौन बताएगा मुझे? मुझे भी पढ़ना बड़ा अच्छा लगता है। नाना कहते हैं कि आप सारा दिन पढ़ती रहती हैं और आपको खाने तक की याद नहीं रहती।
पलविका- अब यहीं बातें करती रहोगी तो थक जाओगी चलो अब।

रश्मि पलविका के साथ उसके कमरे तक गयी, कमरा क्या था लाईब्रेरी थी पूरी चारों दीवारें किताबों की अलमारियों से ढकी थी… बिस्तर पर किताबें स्टडी टेबल पर किताबें… उसने एक खाली जगह देखकर किताबें रख दी।
रश्मि- इतनी सारी किताबें? मैं पढ़ सकती हूँ इन्हें।
पलविका- अरे यह भी कोई पूछने की बात है। किताबें सब की होती हैं।

रश्मि- दीदी आप कितनी अच्छी हैं उससे भी अच्छी जितनी कि नाना आपकी तारीफ करते हैं।
पर तभी रश्मि को उसकी माँ ने बुला लिया- छोटी मालकिन को तंग मत कर, चल नीचे आ!
रश्मि- मैं अभी जाती हूँ, आप रेस्ट करो!
पलविका- अरे ऐसी कोई बात नहीं है और हाँ तुम जब चाहो मेरे पास आ सकती हो शर्माने के ज़रूरत नहीं है।
यह कह उसने रश्मि को गले से लगा लिया।

रश्मि नीचे चली गयी, पलविका ने दरवाजा बंद किया और नहाने चली गयी। उसके बड़े से बाथरूम में तीन कांच की शेल्फें थीं जो तरह तरह के साबुनों, क्रीमों, शैम्पू, परफ्यूम्स, डिओडरेंट, फेसवाश और न जाने कैसी कैसी चीजों से भरी पड़ी थी. असल में इन्हें रूपिका मंगवाती अपने लिए भी और उसके लिए भी पर हर बार उसके बाथरूम से पुरानी बोतलें जो भरी की भरी ही उठा कर नई रख दी जातीं वो डेटोल साबुन से ही नहा लेती और अक्सर उसी से बाल भी धो लेती, उसे बाकी चीजों से कोई मतलब ही नहीं था।

पलविका ने फ्रेश होने के बाद कैपरी और टैंक टॉप (स्लीव लेस टॉप) पहन लिया, थके होने के कारण वो ब्रा पहनना भूल गई जिस कारण उसके पानी की बूंदों की शेप वाले मोटे मोटे स्तन पर अंगूर के आकार के निप्पल उभर आये… पर इस सब से बेखबर वो कुछ खाने के लिए नीचे उतरने लगी तो रश्मि उसे सीढ़ियों पे मिल गई जो उसके लिए आलू के परांठे और मिल्कशेक ला रही थी।
रश्मि की नज़र पलविका की छाती पर पड़ी तो वो समझ गई कि पलविका ब्रा पहनना भूल गयी है।
दोनों पलविका के रूम में आतीं हैं।

रश्मि- दीदी, एक बात कहूँ, आप बुरा तो नहीं मानोगी न?
पलविका- बोलो, नहीं मानूँगी बुरा?
रश्मि- दीदी, आप न ब्रा पहनना भूल गयी हो।
पलविका- अरे हां, भूख लगी थी न इसिलए… पर तुझे कैसे पता चला?
रश्मि- आपके निप्पल तो देखो, कैसे बाहर आ रहे हैं।
पलविका- तो इसमें क्या है? शरीर है वो भी, अब काट तो नहीं सकती न।
रश्मि- दीदी वो बात नहीं, पर आपको ऐसे कोई देख लेता तो? पता कितना बुरा जमाना है? आप ध्यान दिया करो।
पलविका- जमाना अगर गलत है तो क्या उससे लड़ना, सुधारना भी तो हमारा ही काम है।

रश्मि- वो तो है। वैसे आप हो बड़ी सेक्सी… क्या फिगर है आपकी? एकदम अप्सरा हो। बहुत से लड़के आप…
वो कहते कहते रुक गयी।
पलविका- कहते कहते क्यों रुक गयी? बहुत से लड़के प्रोपोज़ करते हैं पर मेरे पास इन सब एडल्ट बातों के लिए वक़्त नहीं है। और तू कौन सी सी कम सुंदर है? पूरी अजंता की मूरत है। पर यँहा के माहौल में अपनी सादगी मत खो देना, पूरी उम्र पड़ी है प्यार व्यार के लिए… पहले पढ़ लिख ले।
रश्मि- जी दीदी।

पलविका- बुरा मान गयी? अरे मैं ऐसी ही हूँ मुँह फट और सिर्फ बोलती ही तीखा नहीं हूं अगर ज़रूरत पड़े तो एक साथ दो- चार लफंगों को पीट सकती हूँ। ब्लैक बेल्ट चैम्पीयन हूँ।
रश्मि- सॉरी दीदी, गाँव में आपकी तरह कोई नहीं था न इसिलए आपकी बात को समझ नहीं पाई।
पलविका- तुम्हारे परिवार में कौन कौन है?
रश्मि- मैं, माँ और भाई…
पलविका- तुम्हारे पापा नहीं हैं?
रश्मि- ज़िंदा है वो पर हमारे साथ नहीं रहते।
पलविका- क्यों?
रश्मि- माँ कहती है वो शराब बहुत पीते थे और माँ को मारते थे पर माँ उनके साथ रहती रही पर मेरे और भाई के जन्म के बाद उन्होंने हमें घर से बाहर निकाल दिया क्योंकि भाई बीमार था… बीमार नहीं, असल में उसका ब्रेन नार्मल नहीं है… हम दोनों ट्विन्स हैं पर उसका दिमाग अभी भी छोटे बच्चे जैसा है।

पलविका रश्मि को बाहों में भरते हुए- कितना निर्दयी इंसान होगा वो जिसने अपने बच्चों और बीवी को निकाल दिया।
रश्मि- मुझे तो अपने बाप की याद ही नहीं है। और अच्छा ही है क्योंकि इससे मुझे तकलीफ कम होती है। दीदी तुम्हें अपनी माँ की याद आती है?
पलविका- याद तो आती है। पापा हमारा बहुत ख्याल रखते हैं पर माँ तो माँ होती है ना!

दोस्तो, आप सहलियों की बातें सुनकर थोड़ा बोर हो चुके होंगे चलिए आप थोड़ा गर्म करते पर उसके लिए हमें रूपिका और महेश के पास चलना होगा।

महेश रूपिका के मैसेज में दिए टाइम के हिस्साब से ठीक 6.30 बजे ऑफिस आ गया।

रूपिका जब ऑफिस से बाहर निकली तो उसे शिफऑन की साड़ी में देखकर मेहश चकित सा रह गया, इतनी सेक्सी वो आज तक न लगी थी। साड़ी में जो मादकता है वो दुनिया की किसी दूसरी पोशाक में नहीं।

रूपिका ने महेश को कार की चाबी दी और सुखना लेक चलने को कहा. पर आज वो बैक सीट पर न बैठ के फ्रंट सीट पर बैठी महेश के साथ। दोनों सुखना लेक पहुंचे तो हल्का हल्का अँधेरा छाने लगा था, प्रेमी जोड़े लेक के किनारे हाथों में हाथ डाले बैठे थे, कुछ तो एक दूसरे की गोद में थे और कुछ एक चुम्बन करने में खोए हुए थे.

ऐसे ही एक जोड़े को देख कर जब रूपिका ने महेश को देखा तो वो भी उसी को देख रहा था, दोनों की आँखें मिली और दोनों ही थोड़ा झेंप गए यह सोच कर कि सामने वाले ने हमारी सोच को पढ़ लिया होगा।
दोनों एक कोने में बैठ गए। दोनों के ही दिल जोरों से धड़क रहे थे.

रूपिका ने धीरे से अपना हाथ महेश के गर्म सख्त हाथ पे रख दिया. किसी लड़की का यूँ छूना महेश के लिए पहली बार था, उसके बदन में एक करंट सा दौड़ गया, दोनों ने एक दूसरे को देखा और देखते रह गए.

दुनिया उनके लिए गौण ही गयी और उनके चेहरे एक दूसरे की तरफ बढ़ने लगे, दोनों के होंठ मिले और एक लम्बे चुम्बन में बदल गए।

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