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मेरा नाम सुजाता है, मैं अपनी एक सहेली की सेक्स स्टोरी बताती हूँ. उसका नाम रंजना है, आगे की स्टोरी उसी की जुबानी सुनिए. मेरा नाम रंजना ह...

कामुकता वश ननदोई से चूत गांड की चुदाई करवा ली


मेरा नाम सुजाता है, मैं अपनी एक सहेली की सेक्स स्टोरी बताती हूँ. उसका नाम रंजना है, आगे की स्टोरी उसी की जुबानी सुनिए.

मेरा नाम रंजना है, मेरी उम्र 34 साल है. मैं दिखने में बहुत खूबसूरत और सेक्सी हूँ. मेरे मम्मों का साइज 38 इंच है. मेरी गांड बहुत गोल है, मैं दूध सी गोरी हूँ. मेरी कमर बहुत ही लचकदार और कातिल है.

मेरे पति का नाम ललित है, वो एक फैक्ट्री में काम करते हैं. मेरे ससुर नहीं हैं, सास हैं और मेरी एक ननद भी हैं जो शादीशुदा हैं. उसका नाम शीतल है, वो 30 साल की है, वो भी बहुत कामुक औरत है. अभी तक उसे कोई बच्चा नहीं हुआ है, जबकि उसकी शादी को 4 साल हो गए हैं. मेरे भी कोई बच्चा नहीं है, मेरी शादी को भी 8 साल हो गए हैं.

मेरे ननदोई जी का नाम विक्रम है, वो 32 साल के जवान आदमी हैं और वो दिखने में भी सुंदर हैं.

मेरे ननदोई जी के बारे में बता दूँ, वो एकदम सीधे साधे आदमी हैं. वो जब भी घर आते हैं, तो कोई गलत बात नहीं करते हैं.

एक दिन मैंने अपनी ननद से पूछा- शीतल ये बता, ननदोई जी इतना शरमाते हैं, रात को तेरे साथ भी ऐसा ही करते हैं?
वो बोली- भाभी, उनके शरमाने पे मत जाओ… रात को मुझे खूब परेशान करते हैं.
ननद की यह बात सुनकर मैं हैरान रह गई कि वो तो जब घर आते हैं तो कुछ बोलते ही नहीं.



फिर एक दिन ननद और ननदोई जी मेरे घर आए. मैंने उनके लिए चाय बनाई और दोनों लोगों को दी. ननद और ननदोई मेरे घर लगभग एक साल के बाद आये थे.
मैंने पूछा- क्यों शीतल.. भाभी की याद नहीं आती, जो इतने दिनों बाद आई है.
वो बोली- क्या करूँ भाभी इनका ट्रांसफर ही नहीं हो रहा था. लेकिन अब इनका ट्रांसफर आपके यहाँ ही हो गया है.
मैंने कहा- चलो ये अच्छी बात है.

फिर कुछ देर बात करने के बाद ननद मेरी सास के साथ एक पड़ोसी के यहाँ चली गई. मैं और ननदोई जी बातें करने लगे. काफी देर हो गई ननद और सास भी वापस आ गए. रात को सबने खाना खाया और सोने लगे.
कमरे में मेरे पति पुनीत ने मुझे पकड़ कर किस करने लगे. मैंने उनसे कहा- हटो ना पुनीत, क्या कर रहे हो.
लेकिन उनकी कामुकता परवान चढ़ी थी तो वो मेरी मैक्सी के ऊपर से मेरी चुचियों को दबाने लगे. मुझे भी गर्मी चढ़ गई. मैंने अपने हाथ को उनके नेकर में डाल कर उनके लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी.

पुनीत बोले- लगता है रानी, आज तुम भी चुदासी हो.
मैंने कहा- हाँ मैं चुदासी हूँ.. तो चोदो ना मुझे.

फिर वो मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी मैक्सी को ऊपर उठा कर मेरी गीली चूत में अपने लंड को डालने लगे. उन्होंने मेरी चूत में अपने लंड को पेल दिया और मुझे चोदने लगे.
वो मुझे धीरे धीरे धक्के लगा रहे थे और मुझसे बातें भी कर रहे थे. वो बोल रहे थे- रंजना, तुम्हारी चूत आज भी बहुत मजा देती है.
मैं- हां आह.. जी हाँ.. जरा जोर से पेलो यार..
फिर वो तेजी से धक्के लगाने लगे. मैं आह..सस्स… हां हां स्स करती रही. फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए और हम दोनों सो गए.

अगले दिन ननद ननदोई जी चले गए, ननद जाते समय बोली- भाभी, अगर इनको काम में देर हो जाएगी तो ये आपके यहाँ रात को रुक जाया करेंगे.
मैंने हंस कर कहा- ये भी कोई कहने की बात है.

ननदोई का बैंक मेरे घर के पास में ही था. लेकिन ननद को अपने ससुराल में ही रहना था. कुछ दिनों बाद मेरे पति फैक्ट्री के काम से बाहर चले गए. बिना लंड के मेरी रातें नहीं कट रही थीं.
दूसरे दिन रात को ननदोई जी आये और बोले- आज बैंक में काम ज्यादा था इसलिए यहीं आ गया.
मैंने कहा- अच्छा किया.
फिर मैंने उनको खाना दिया और उनके बिस्तर एक कमरे में लगा दिए.

मेरी सास अपने कमरे में जा चुकी थीं. फिर मैंने सोचा क्यों ना आज ननदोई जी से मजे लिए जाएं. मैंने एक झीनी सी नाइटी पहनी थी, जिसमें मेरी चुचियां साफ दिख रही थीं. मैं उनको खाना देते समय झुकी तो ननदोई जी के सामने मेरी चुचियां एकदम नंगी दिख रही थीं. उनकी नजरें मेरी चुचियों पर थीं.
मैंने मजा लेते हुए कहा- क्या हुआ?
वो सकपका गए और बोले- कुछ नहीं.
फिर वो अपने कमरे में चले गए.

सुबह मैं उनको उठाने के लिए गई तो देखा उनका लंड नेकर में तंबू बनाए खड़ा था. पर वो सो रहे थे.
मैंने उनके उठाया और बोला- उठिये ननदोई जी, सुबह हो गई.
कुछ देर बाद वो अपने काम पे चले गए. अगली रात वो फिर आ गए, मैंने सोचा आज तो इतना टाइम भी नहीं हुआ है.

मैं समझ गई कि ननदोई जी भी मुझे चोदने के चक्कर में हैं. मैंने भी मन बना लिया था.
रात को मैं उनके कमरे में उनके बेड में बैठ कर बातें कर रही थी. मैंने अपने बालों को खुला रखा था और लाल नाइटी में एकदम मस्त माल लग रही थी.
मैंने अंगड़ाई लेते हुए बोला- ननदोई जी, आप तो ननद को ठीक से प्यार भी नहीं कर पाते होंगे.
वो बोले- क्यों?
मैंने कहा- आप शरमाते बहुत हो.
वो हँसने लगे. फिर मैंने उनकी जांघ को अपने हाथ से सहलाते हुए कहा- आज अपनी सलहज को भी प्यार कर लो.

यह सुनते ही उन्होंने मुझे पकड़ा और किस करने लगे और मेरे गुलाबी होंठों को चूसने लगे, मेरी चुचियों को तेजी से दबाने लगे.
मैंने चूमते हुए कहा- आराम से करो ना राजा.. आज लूट ही लो मेरी इज्जत.
वो बोले- रंजना तुम नहीं जानती, मैं तुम्हे कब से चोदने के सपने देख रहा हूँ.
मैंने कहा- तो आज रगड़ कर चोदिए मुझे.

फिर मैंने उनके लोअर को उतार दिया और उनके लंड को पकड़ लिया. मैं हैरान हो गई थी कि उनका लंड मेरे पति को मुकाबले काफी मोटा और लम्बा था. वो मेरी नाइटी को उतार कर ब्रा के ऊपर से ही मेरी मोटी चुचियों को दबा रहे थे.
मैं ‘उमआआआ आह.. ननदोई अब उतार भी दो मेरी ब्रा को.. और पीलो मेरे दूध..’

ननदोई जी ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे गोरे गोरे मम्मों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे. मुझे मम्मे चुसवाने में बहुत मजा आ रहा था. फिर वो मेरे निप्पलों को काटने लगे. मैं ‘आह आह..’ कर रही थी.
फिर उन्होंने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगे. वे बोले- लगता है बड़ी चुदासी हो भाभी.. तुम्हारी चूत तो बहुत गर्म है.
मैंने कहा- हाँ राजा आज इसे आपको ही ठंडा करना है.

मैंने अपनी पैंटी को नीचे कर दिया और ननदोई जी मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगे. फिर उन्होंने मेरी आने सर को नीचे की और मेरी गर्म चूत में अपनी जीभ को रख कर बड़ी बेताबी से चूत चाटने लगे. मेरी चूत में आग लग गई. मैंने होश खो दिए. मैं तेजी से चीख रही थी ‘आह.. हां.. आआआ.. हां.. प्लीज़.. न..ननदोई जी मुझे चोद दो.. सस्स हाय मेरी चूत आआआहह..’
मैं अपने सर को इधर उधर कर रही थी.

कुछ ही पलों बाद मैंने चिल्लाते हुए कहा- अब चोद भी दो.. अपनी सलहज को..
उन्होंने मेरी चूत की फांकों में अपने सुपारे को रखा और एक ही धक्के में मेरी पनियाई हुई चूत के अन्दर कर दिया.
उनके हब्शी लंड के एकदम से घुसने से मैं फड़फड़ाने लगी और बोली- आह…. हाय रे फाड़ दी मेरी चूत..

ननदोई जी तेजी से मुझे चोदने लगे, वो भी मुझसे बोले- आह रंजना तुम्हारी चूत बहुत मस्त है.. अब सिर्फ मैं ही तुमको चोदूँगा..
मैं- आह.. मेरे राजा मेरी जवानी अब तुम्हारी है.

कुछ ही पलों बाद मेरी एक चीख के साथ मेरा पानी निकल गया, पर वो अभी भी मेरी चूत को बजा रहे थे. कुछ देर बाद वो हांफते हुए बोले- मैं झड़ने वाला हूँ बीज कहाँ डालूँ?
मैंने कहा- जब बीज आ रहा है, तो मेरी चूत में ही बो दो.
उन्होंने मेरी चूत में अपने गर्म रस को छोड़ दिया और मुझे चिपका कर सो गए.

फिर सुबह ननदोई जी को मैंने चाय दी. उस वक्त मैंने एक नेट की साड़ी पहनी थी. ये देख कर वो सुबह से ही गर्म हो गए. ननदोई ने मुझे अपने ऊपर गिरा कर मेरे गुलाबी होंठों को चूसने लगे.
मैंने कहा- बैंक नहीं जाना?
वो बोले- नहीं, आज देर से जाना है.

फिर उन्होंने साड़ी के ऊपर से मेरी चूत में अपनी उंगली को डाल दिया और चूत सहलाने लगे.
वो बोले- लगता है तुम्हारी चूत तैयार है.
मैंने कहा- नहीं अभी नहीं.. कल तुमने इतने बड़े लंड से चोदा है कि मेरी चूत सूज गई है.
फिर वो मेरी गांड पे हाथ से दबाने लगे. वो बोले- ठीक है आज तुम्हारी गांड मारूँगा.
मैं कहा- रात को ठीक से मार लेना.
उन्होंने कहा- दिन में ही लूंगा, आज मुझे बैंक में एक काम है.. मैं दो घण्टे में आ जाऊँगा.

फिर वो तैयार होकर चले गए. मैंने घर का काम किया और अपनी सास को बहाने से मंदिर भेज दिया. वहाँ भागवत का प्रोग्राम चल रहा था.
वो बोलीं- मैं शाम को आऊँगी.
मैंने उन्हें विदा करके अपनी गांड को चिकनी कर लिया.

एक घंटे बाद ननदोई जी आए, मैंने उन्हें खाना खिलाया और आँख मार दी. वो मुझे पकड़ने लगे.
मैंने कहा- रुकिए आप बेडरूम में चलिए, मैं वहीं आती हूँ.

वो लंड सहलाते हुए चले गए. मैं सिर्फ सफ़ेद ब्लाउज और गुलाबी पेटीकोट में कमरे में पहुँची. वो मुझे देख कर पकड़ कर मेरी चुचियों को दबाने लगे.
बोले- इतना मजा तो मुझे मेरी बीवी भी नहीं देती.
मैंने कहा- आप मुझे अपनी बीवी ही समझ लो.

उन्होंने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच कर ढीला कर दिया, पेटीकोट जमीन पे आ गिरा. फिर उन्होंने मेरे ब्लाउज को एक झटके में फाड़ दिया और बिना ब्रा के मेरी चुचियां बाहर आ गईं. मैंने भी उनके सारे कपड़े उतार दिए और उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें किस करने लगी. मैंने उनके लंड को अपनी चूत पर सैट किया और उसे अन्दर कर लिया. वो नीचे से कमर हिलाने लगे. मैं भी गांड मटकाते हुए उनके हब्शी लंड पर उछलने लगी. हम दोनों की सिसकारियों की आवाजें आ रही थीं ‘आह..आआह.. सिसस्स हाँ ऐसे ही चोदो.. उमआआआ मर गई हां..’
फच्च फच्च हहहहह फच्च..
वो भी पूरे जोर से मुझे चोद रहे थे ‘ले साली रंडी.. आआह फच्च ले साली कुतिया छिनाल स्स्स.. कितनी गर्म है बहन की लौड़ी.. ले..’
हम दोनों 20 मिनट की चुदाई के बाद झड़ गए.

फिर मैं नंगी ही उठ कर गई और चाय बनाने रसोई में चली गई. हम दोनों ने नंगे रह कर ही चाय पी.
वो बोले- रंजना अब गांड भी दो ना.
मैंने कहा- किसने मना किया है, मार लो मेरी गांड को.
वो हँसने लगे, बोले- तुम तो सब देने को तैयार हो.

कुछ देर बाद उनका लंड फिर से सलामी देने लगा. मैंने तेल लाकर उनके लंड पर लगाया. ननदोई ने मेरी गांड में लंड लगाने की तैयारी में लग गए. उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में बेड पर झुका कर मेरी गांड पर अपने लंड को टिका दिया और धीरे से अन्दर डालने लगे. धीरे धीरे करके उन्होंने एकदम से अपने आधे से ज्यादा लंड को मेरी गांड में खोंस दिया.
मैं चिल्लाने लगी- आआह मर गई ननदोई जी बाहर करो..

वो धीरे धीरे धक्के लगाने लगे, मैं रोने लगी. कुछ दर्द के बाद मुझे भी मजा आने लगा. अब वो तेजी से मेरी गांड मार रहे थे.
‘इसिसस्स आआह.. ऐसे ही मारो मेरी गांड को मेरे राजा.. आआह उमामरई आआह हाय दैया.. लहां हां हां..’
उन्होंने मेरी गांड को काफी देर तक बजाया साथ ही मेरी चूत के दाने को भी मींजते रहे. फिर मेरी गांड में ही अपने लंड के माल को डाल दिया.

मुझे अपने ननदोई के लंड से चुदने में मजा आने लगा था. मैं उनसे खूब चुदने लगी और उनके वीर्य से ही संतुष्ट होने लगी.
इस समय मेरा एक बच्चा है, जो मेरे ननदोई जी का है. आज भी वो मुझे चोदते हैं.

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